फ़रवरी 12, 2026

इसराइल-ईरान तनाव से हिली वैश्विक अर्थव्यवस्था: अमेरिकी शेयर बाजार फ्यूचर्स में भारी गिरावट, कच्चे तेल के दाम में उछाल

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Anoop singh

वाशिंगटन/तेल अवीव, 13 जून 2025 – शुक्रवार तड़के विश्व बाजारों में भारी उथल-पुथल देखी गई जब इसराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इस हमले के बाद जहां वैश्विक राजनीतिक तनाव और गहराया है, वहीं आर्थिक बाजारों में भी इसकी गूंज स्पष्ट दिखाई दी।

अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों से जुड़े फ्यूचर्स में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।


📉 अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट

Dow Jones Industrial Average से जुड़े फ्यूचर्स लगभग 464 अंक या 1% लुढ़क गए।

S&P 500 फ्यूचर्स में 0.9% की गिरावट आई।

वहीं Nasdaq 100 फ्यूचर्स में 1.1% की गिरावट देखी गई।

यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब निवेशक पहले से ही महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक सुस्ती को लेकर चिंतित हैं।


🛢️ तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

इसराइल-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

ब्रेंट क्रूड ऑयल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में 8% से अधिक की बढ़त देखी गई।

WTI क्रूड की कीमत 74 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है।

ऊर्जा की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए चिंता का विषय बन सकता है, जिससे घरेलू ईंधन कीमतों और महंगाई पर असर पड़ सकता है।


⚠️ इमरजेंसी और सुरक्षा स्थिति

इसराइल के रक्षा मंत्री इज़राइल कात्ज़ ने हमले के बाद देश में विशेष आपातकालीन स्थिति की घोषणा की है। इसराइली मीडिया और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह हमला ईरान के कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किया गया है।

वहीं NBC न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इन हमलों में कोई भी भूमिका या सहायता नहीं दी है, यह दो अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है।


🌍 वैश्विक निवेशकों में डर का माहौल

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और अधिक बढ़ता है तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हो सकती है।

निवेशक अब “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं, जैसे सोना और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड।

इस घटना का असर आने वाले दिनों में भारत समेत उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों पर भी दिख सकता है।


📌 क्या हो सकता है आगे?

वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि कूटनीतिक समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो यह संकट वैश्विक मंदी जैसी स्थिति को जन्म दे सकता है। तेल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और घरेलू बजट पर भी असर पड़ेगा।


निष्कर्ष:
इसराइल-ईरान तनाव न केवल मध्य-पूर्व की राजनीति को गर्मा रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता को भी चुनौती दे रहा है। अमेरिकी बाजार में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसके शुरुआती संकेत हैं। आने वाले दिनों में यह स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।


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