फ़रवरी 14, 2026

डोनाल्ड ट्रंप और असीम मुनीर की प्रस्तावित मुलाकात:

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Anoop singh

वाशिंगटन,
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के संभावित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल असीम मुनीर के बीच व्हाइट हाउस में प्रस्तावित बैठक ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में गहरी सरगर्मी पैदा कर दी है। यह मुलाकात न सिर्फ अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

मुलाकात के संभावित एजेंडे:

इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है:

  1. अफगानिस्तान में स्थिरता:
    अमेरिका और पाकिस्तान दोनों के लिए अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता एक प्रमुख चिंता है। तालिबान के साथ बढ़ते तनाव और आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों की रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हो सकती है।
  2. आतंकवाद विरोधी सहयोग:
    ट्रंप प्रशासन के दौरान पाकिस्तान को बार-बार यह संदेश दिया गया था कि वह आतंकवाद के खिलाफ ‘निर्णायक कदम’ उठाए। ऐसे में असीम मुनीर के साथ होने वाली बातचीत में आतंकवाद पर संयुक्त कार्रवाई को लेकर नई रणनीति सामने आ सकती है।
  3. चीन-पाक रिश्तों पर अमेरिकी चिंता:
    अमेरिका, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत बन रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को रणनीतिक खतरा मानता है। यह मुद्दा भी बातचीत का प्रमुख हिस्सा हो सकता है।
  4. भारत और कश्मीर मुद्दा:
    हालांकि अमेरिका आधिकारिक तौर पर भारत के साथ रणनीतिक साझेदार बना हुआ है, फिर भी पाकिस्तान के साथ बातचीत में कश्मीर मुद्दे पर परोक्ष चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह भारत की निगाह में चिंता का विषय बन सकता है।
  5. क्रिप्टो और सैन्य तकनीकी साझेदारी:
    ट्रंप की आर्थिक प्राथमिकताओं में क्रिप्टोकरेंसी और रक्षा क्षेत्र में निवेश अहम रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की सेनाएं क्रिप्टो फाइनेंसिंग से कैसे प्रभावित हो रही हैं और अमेरिका क्या सहयोग कर सकता है – इस पर भी बातचीत संभव है।

क्यों है यह मुलाकात खास?

अमेरिका में 2024 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद रिपब्लिकन पार्टी का रुख अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपेक्षाकृत अधिक ‘सौदेबाज़’ माना जाता रहा है। डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति पारंपरिक से हटकर और व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित रही है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष से सीधे बातचीत इस बात का संकेत हो सकता है कि आने वाले समय में अमेरिका पाकिस्तान को फिर से एक रणनीतिक सहयोगी की तरह देख सकता है – बशर्ते कुछ अहम गारंटी मिलें।

भारत की चिंता स्वाभाविक

नई दिल्ली के लिए यह मुलाकात एक ‘रेड फ्लैग’ की तरह है। जहां एक ओर भारत अमेरिका के साथ क्वाड जैसे मंचों पर साझेदारी बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप और पाकिस्तानी फौज की यह मुलाकात कई सवाल खड़े करती है। भारत को यह डर सता सकता है कि कहीं अमेरिका-पाक रिश्तों में नई गर्माहट भारत के सुरक्षा हितों को नुकसान न पहुंचाए।


निष्कर्ष:

डोनाल्ड ट्रंप और असीम मुनीर की प्रस्तावित बैठक केवल अमेरिका-पाक संबंधों तक सीमित नहीं है। यह मुलाकात एक बड़े अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिदृश्य का संकेत देती है जिसमें अफगान संकट, आतंकवाद, चीन की भूमिका, भारत-पाक रिश्ते और रणनीतिक संसाधनों की होड़ सब कुछ शामिल है। यदि यह बैठक वास्तव में होती है और परिणाममूलक साबित होती है, तो यह दक्षिण एशिया की दिशा और दशा को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।


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