फ़रवरी 12, 2026

योग – भारत की ऋषि परंपरा से विश्व को मिला अमूल्य उपहार

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Anoop singh

21 जून 2025, लखनऊ:
11वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश-विदेश के सभी योग साधकों को शुभकामनाएं दीं और योग के आध्यात्मिक एवं शारीरिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संदेश की शुरुआत एक संस्कृत श्लोक से की – “शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्”, जिसका अर्थ है: “धर्म के पालन के लिए शरीर ही पहला साधन है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक शांति और संतुलन भी प्रदान करता है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण जीवनशैली है जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ती है।

योगी आदित्यनाथ ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से योग को वैश्विक मंच पर पहचान मिली। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की, जिससे भारत की इस आध्यात्मिक विरासत को दुनिया भर में सम्मान मिला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरा विश्व गर्व के साथ योग को अपना रहा है और भारतीय संस्कृति से जुड़कर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। योग आज न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का साधन बन चुका है, बल्कि यह वैश्विक शांति और एकता का संदेश भी बन गया है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस पावन अवसर पर भारत के विभिन्न कोनों में लाखों लोग एक साथ योग कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह परंपरा केवल भारत की नहीं रही – अब यह पूरी दुनिया की धरोहर बन चुकी है।

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