शीर्षक: अंतरिक्ष से आत्मा तक: योग दिवस 2025 में इसरो की अनोखी भागीदारी

बेंगलुरु, 21 जून 2025 – जब विज्ञान और संस्कृति एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो न केवल तकनीकी उन्नति होती है, बल्कि मानवता का भी कल्याण सुनिश्चित होता है। इसी सोच के साथ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 में सक्रिय भागीदारी करते हुए ‘एक धरती, एक स्वास्थ्य’ की थीम को आत्मसात किया।
इसरो ने पूर्व में ट्विटर और अब ‘एक्स’ कहे जाने वाले प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहा है। संगठन ने इस वर्ष की आधिकारिक थीम “योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” का समर्थन करते हुए इसे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक बताया।
योग और विज्ञान का अद्भुत संगम
इसरो का यह कदम यह स्पष्ट करता है कि योग केवल पारंपरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक सोच, मानसिक संतुलन और टिकाऊ जीवनशैली का भी आधार है। इसरो ने अपने संदेश में लिखा, “हम वैज्ञानिक उपलब्धियों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए समग्र विकास की दिशा में बढ़ रहे हैं।”
संगठन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, जिससे वे केवल स्वस्थ ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से सशक्त और स्थिर बन सकें — ठीक वैसे ही जैसे अंतरिक्ष अभियानों के लिए वैज्ञानिकों को अनुशासन और एकाग्रता की आवश्यकता होती है।
प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन और योग की जन-भागीदारी
योग दिवस 2025 का केंद्रीय कार्यक्रम आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP) के अंतर्गत हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया। यह आयोजन देशभर में 10 लाख से अधिक स्थानों पर एक साथ समन्वित किया गया, जिसमें लगभग 3 लाख लोगों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया।
थीम का संदेश: प्रकृति और मानव के बीच संतुलन
“एक धरती, एक स्वास्थ्य” थीम इस वर्ष केवल व्यक्ति की सेहत पर नहीं, बल्कि धरती के पर्यावरणीय संतुलन और वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र पर भी केंद्रित रही। यह थीम भारतीय संस्कृति की उस मूल भावना से जुड़ी है जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे सन्तु निरामयाः” जैसे विचारों को प्रोत्साहित करती है।
आयुष मंत्रालय की व्यापक पहल – योगा संगम
आयुष मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘योगा संगम’ अभियान ने यह सुनिश्चित किया कि देश के कोने-कोने से लोग इस आयोजन से जुड़ सकें। सुबह 6:30 बजे से 7:45 बजे तक सामूहिक योग अभ्यास आयोजित किए गए, जिनमें भारी संख्या में छात्रों, कर्मचारियों, सैनिकों, वैज्ञानिकों और आम नागरिकों ने भाग लिया।
निष्कर्ष: भविष्य की ओर एक संतुलित दृष्टिकोण
इसरो की इस भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि योग केवल एक पौराणिक परंपरा नहीं, बल्कि यह आधुनिक विज्ञान की आवश्यकताओं के अनुरूप मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत करने वाला उपकरण भी है। योग दिवस 2025 भारत के लिए यह बताने का एक सशक्त माध्यम बना कि कैसे विज्ञान और संस्कृति मिलकर मानवता को एक नई दिशा दे सकते हैं।
