23 राज्यों में मौसम का बड़ा अलर्ट, भारी बारिश और तेज हवाओं से बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में सितंबर के अंतिम दिनों में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। बंगाल की खाड़ी से जुड़े मौसम तंत्र के प्रभाव के कारण पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में कई क्षेत्रों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन, सड़क यातायात और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर दिखाई दे रहा है।

भारतीय मौसम विभाग के ताजा क्षेत्रीय पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 27 सितंबर को भी दोनों क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके बाद 28 सितंबर से चेतावनी की स्थिति में कमी आने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से हालात बिगड़े
उत्तर प्रदेश इस मौसम प्रणाली से प्रभावित प्रमुख राज्यों में शामिल है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निचले इलाकों में पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर प्रशासन को राहत एवं बचाव संबंधी गतिविधियां भी संचालित करनी पड़ी हैं।
राज्य में बारिश का प्रभाव शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में देखा जा रहा है। लखनऊ समेत कई शहरों में सड़कें जलमग्न होने की खबरें सामने आई हैं। वहीं ललितपुर और कन्नौज जैसे क्षेत्रों में भी बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर मुश्किलें बढ़ी हैं।
मौसम विभाग ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। 26 सितंबर को दोनों क्षेत्रों में अत्यंत भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि 27 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका भी जताई जा रही है। नदियों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने की जरूरत है। ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों पर भी असर पड़ सकता है।
बिहार में नदियों के जलस्तर पर नजर
बिहार में भी लगातार बारिश के कारण स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। पड़ोसी नेपाल में हो रही बारिश का प्रभाव बिहार की नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। विशेष रूप से गंडक और कोसी नदी प्रणालियों के आसपास प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है।
नदियों के जलस्तर में तेजी आने की स्थिति में तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन द्वारा निचले इलाकों की निगरानी, राहत सामग्री की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
बिहार में 26 और 27 सितंबर को कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना पहले ही जताई गई है। इस वजह से लोगों को मौसम संबंधी सरकारी निर्देशों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
झारखंड में बारिश और तेज हवाओं का असर
झारखंड में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने 26 सितंबर को राज्य में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। 27 सितंबर को भी आंधी-तूफान जैसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
राजधानी रांची में खराब मौसम के कारण जनजीवन प्रभावित होने की खबरें हैं। तेज हवाओं के दौरान पेड़ गिरने जैसी घटनाएं सामने आने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ने की आशंका रहती है, इसलिए यात्रियों को अपनी उड़ानों की स्थिति की जानकारी संबंधित एयरलाइन से लेने की सलाह दी जाती है।
ओडिशा में कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर
ओडिशा में बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई स्थानों पर नदियों के खतरे के निशान के ऊपर बहने की स्थिति सामने आई है। इसके चलते संवेदनशील इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों को राहत केंद्रों तक पहुंचाया गया है।
बारिश प्रभावित इलाकों में प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना, भोजन-पानी उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य सुविधाओं को सक्रिय रखना है। निचले इलाकों में जलभराव तथा बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रख रही हैं।
सितंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र ने ओडिशा और आसपास के राज्यों में बारिश की गतिविधि को बढ़ाया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस प्रणाली ने तटीय क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए देश के अंदरूनी हिस्सों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ाया है।
बंगाल की खाड़ी का मौसम तंत्र बना मुख्य वजह
मौसम में आए इस बदलाव की प्रमुख वजह बंगाल की खाड़ी से विकसित हुआ निम्न दबाव क्षेत्र और उससे जुड़ी मौसमी गतिविधियां हैं। शुरुआती दौर में इस प्रणाली के कारण ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका बनी थी। बाद में इसके आगे बढ़ने के साथ मध्य और पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों में भी बारिश का प्रभाव देखा गया।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी प्रणालियां जब समुद्र से जमीन की ओर बढ़ती हैं तो अपने साथ बड़ी मात्रा में नमी लेकर आती हैं। यही नमी कई क्षेत्रों में व्यापक बारिश का कारण बन सकती है। इसके अलावा स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और पहले से सक्रिय मानसूनी परिस्थितियों के कारण कुछ इलाकों में कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है।
48 घंटे महत्वपूर्ण, प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता
अगले 24 से 48 घंटे कई प्रभावित क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बारिश के साथ तेज हवा, बिजली गिरने और अचानक जलभराव जैसी परिस्थितियां लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं। पहाड़ी या नदी किनारे के इलाकों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी के बाद 27 सितंबर को भी भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। वहीं झारखंड में 26 सितंबर को भारी बारिश और 27 सितंबर को गरज-चमक की संभावना दर्ज की गई है।
स्कूलों और यातायात पर असर
लगातार बारिश का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में खराब मौसम और जलभराव को देखते हुए स्कूल बंद रखने जैसे प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। ऐसे फैसले स्थानीय परिस्थितियों और जिला प्रशासन के आदेश के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
सड़क यातायात में जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों और पुल-पुलियों पर पानी आने से आवागमन बाधित होने की आशंका बनी रहती है। हवाई यातायात भी तेज हवाओं और खराब दृश्यता से प्रभावित हो सकता है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लेना जरूरी है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना चाहिए। नदी, नाले और तेज बहाव वाले पानी के आसपास जाने से भी बचना आवश्यक है।
आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और कमजोर ढांचों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को भी स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।
मानसून की विदाई के बीच बदला मौसम
देश के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे देश में बारिश तुरंत समाप्त हो जाएगी। बंगाल की खाड़ी जैसी मौसमी प्रणालियां मानसून की अंतिम अवधि में भी कई राज्यों में बारिश का नया दौर ला सकती हैं। हालिया मौसम घटनाक्रम इसका उदाहरण है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और आसपास के कई क्षेत्रों में लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की जरूरत है। प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय चेतावनियों का पालन और संवेदनशील इलाकों में समय रहते सावधानी बरतना इस मौसम के दौरान सबसे महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: बंगाल की खाड़ी से जुड़े मौसम तंत्र के कारण देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी, झारखंड में भारी बारिश और ओडिशा में नदी जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियों ने प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ाई है। अगले 24 से 48 घंटे में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी रहेगा। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश में 27 सितंबर तक बारिश का प्रभाव बना रह सकता है, जबकि बाद के दिनों में कई क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने की संभावना है।