उरई किसान महापंचायत में राकेश टिकैत ने उठाए किसानों के मुद्दे, कर्जमाफी और बुंदेलखंड पैकेज की मांग
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन की ओर से विशाल किसान महापंचायत का आयोजन किया गया। उरई स्थित गल्ला मंडी में आयोजित इस महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों को संबोधित किया। उन्होंने बुंदेलखंड के किसानों की आर्थिक स्थिति, कृषि लागत, प्राकृतिक आपदा, कर्ज और फसल के उचित मूल्य सहित कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

महापंचायत में किसानों की समस्याओं पर चर्चा करते हुए राकेश टिकैत ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड लंबे समय से सूखा, असमय बारिश और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में इस क्षेत्र के किसानों के लिए सामान्य योजनाओं के साथ विशेष आर्थिक पैकेज की जरूरत है।
बुंदेलखंड के लिए अलग पैकेज की मांग
राकेश टिकैत ने बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज देने की मांग उठाई। उनका कहना था कि क्षेत्र की भौगोलिक और कृषि संबंधी परिस्थितियां देश के कई अन्य हिस्सों से अलग हैं। लगातार प्राकृतिक चुनौतियों के कारण किसानों की आय और कृषि व्यवस्था प्रभावित होती है।
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को अतिरिक्त राहत देने की मांग की। टिकैत के अनुसार, फसल नुकसान के बाद मिलने वाली सहायता किसानों की वास्तविक क्षति के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने बुंदेलखंड के किसानों के कर्ज को माफ करने की मांग भी रखी।
महापंचायत में उन्होंने क्षेत्र की खनिज संपदा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जिस क्षेत्र से प्राकृतिक संसाधन निकलते हैं, वहां के स्थानीय लोगों और किसानों को भी उसके आर्थिक लाभ में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
किसानों की आय और बढ़ते कर्ज का मुद्दा
किसानों की आय दोगुनी करने के सरकारी दावों पर भी राकेश टिकैत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों के सामने आज भी उत्पादन लागत, खाद-बीज, सिंचाई, बिजली और बाजार से जुड़ी कई चुनौतियां मौजूद हैं।
उन्होंने दावा किया कि किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई, जबकि कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है। उन्होंने सरकार से किसानों की आर्थिक स्थिति का आकलन वास्तविक खेत और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर करने की मांग की।
टिकैत ने कृषि उपज के लाभकारी मूल्य के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों और C2+50 प्रतिशत फॉर्मूले को लागू करने की मांग दोहराई। इस फॉर्मूले के तहत फसल की व्यापक लागत के आधार पर किसान को लागत से 50 प्रतिशत अधिक मूल्य देने की मांग की जाती रही है।
प्राकृतिक आपदा के बाद पर्याप्त राहत पर जोर
महापंचायत में प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसल नुकसान का मुद्दा भी प्रमुख रहा। बुंदेलखंड सहित उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए चुनौती बनी रहती है।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसी किसान की फसल प्राकृतिक आपदा में खराब होने के बाद केवल औपचारिक सहायता पर्याप्त नहीं है। किसानों को ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे नुकसान की भरपाई समय पर हो और परिवार पर आर्थिक संकट न आए।
उन्होंने फसल बीमा और राहत वितरण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन और समय पर भुगतान उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते को लेकर चिंता
महापंचायत में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित या चल रही व्यापारिक बातचीत का मुद्दा भी उठा। राकेश टिकैत ने कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि किसी समझौते से घरेलू कृषि उत्पादों की कीमत या किसानों की आय प्रभावित होती है तो उसकी भरपाई के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
किसान संगठनों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां तैयार करते समय घरेलू कृषि बाजार और किसानों की उत्पादन लागत को ध्यान में रखा जाए।
जमीन और सर्किल रेट का सवाल
राकेश टिकैत ने देश में सर्किल रेट बढ़ाने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि जमीन की सरकारी दरों और वास्तविक बाजार परिस्थितियों के बीच अंतर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
भूमि की कीमतों में बदलाव का असर किसानों के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण, मुआवजे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसलिए किसान संगठनों की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया जाता रहा है।
चुनाव आयोग पर भी लगाए आरोप
किसान महापंचायत के दौरान राकेश टिकैत ने राजनीतिक और चुनावी मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि देश में वोट चोरी हो रही है तथा चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने राहुल गांधी द्वारा चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव आयोग चाहे तो निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
हालांकि चुनाव प्रक्रिया और कथित वोट चोरी से जुड़े ऐसे आरोपों को लेकर संबंधित संस्थाओं और राजनीतिक पक्षों के आधिकारिक जवाब तथा उपलब्ध प्रमाणों को अलग-अलग देखना जरूरी है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और सक्षम संस्थाओं की जानकारी महत्वपूर्ण होती है।
2027 के चुनाव को लेकर टिकैत का बयान
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी राकेश टिकैत ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही किसी राजनीतिक दल का समर्थन करेंगे।
टिकैत ने कहा कि जनता अपने स्तर पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उनके अनुसार, बदलाव किसी राजनीतिक दल के समर्थन से नहीं बल्कि जनता के आंदोलन से आता है।
इस बयान के जरिए उन्होंने भारतीय किसान यूनियन की भूमिका को चुनावी राजनीति से अलग रखने की बात कही। हालांकि आने वाले समय में संगठन की राजनीतिक गतिविधियों और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किसानों की रणनीति में क्या बदलाव होता है, यह आगे स्पष्ट होगा।
2020-21 के किसान आंदोलन की मांगों का जिक्र
महापंचायत में राकेश टिकैत ने 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान उठाई गई मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के समय किसानों से जुड़े कई मुद्दे सामने आए थे और उनमें से सभी मांगों का समाधान अभी तक नहीं हुआ है।
किसान संगठनों की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य, किसानों की आय, कृषि लागत और अन्य विषयों पर समय-समय पर सरकार से मांग की जाती रही है। उरई की महापंचायत में भी इन्हीं मुद्दों को नए सिरे से उठाया गया।
टिकैत ने आगामी चुनाव को लेकर भी आशंका जताई और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने किसानों और आम लोगों से अपने अधिकारों तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर जागरूक रहने की अपील की।
महापंचायत से क्या संदेश गया?
उरई की किसान महापंचायत में कृषि संकट, किसानों का कर्ज, बुंदेलखंड की विशेष परिस्थितियां, प्राकृतिक आपदा, फसल का उचित मूल्य और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे कई विषय एक साथ सामने आए। इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों ने कार्यक्रम को राजनीतिक बहस से भी जोड़ दिया।
महापंचायत का मुख्य केंद्र किसानों की आर्थिक समस्याएं रहीं। बुंदेलखंड के लिए विशेष पैकेज और कर्जमाफी की मांग से लेकर कृषि उपज के लाभकारी मूल्य तक, किसान संगठनों ने सरकार से नीतिगत स्तर पर बदलाव की मांग दोहराई।
राकेश टिकैत के संबोधन से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय किसान यूनियन आने वाले समय में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी रखना चाहती है। वहीं, 2027 के चुनाव में किसी दल का समर्थन नहीं करने और स्वयं चुनाव नहीं लड़ने का उनका बयान संगठन की चुनावी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण है।
उरई में हुई इस महापंचायत ने एक बार फिर किसानों की आय, कर्ज, फसल मूल्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े सवालों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और किसान संगठन आगे किस तरह आंदोलन या संवाद की रणनीति अपनाते हैं, इस पर नजर रहेगी।