बौध में प्राथमिक शिक्षकों का पांच दिवसीय अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
सुदाम बाबू स्टेट ब्यूरो ओडिशा
हिट एंड हॉट न्यूज़
बौध, ओडिशा, 25 सितंबर। प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी भाषा के शिक्षण को अधिक प्रभावी, सरल और व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बौध में समापन हो गया। राज्य भाषा एवं शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान, भुवनेश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन योगेंद्र देव हाई स्कूल के शताब्दी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में जिले के प्राथमिक विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों ने हिस्सा लिया और अंग्रेजी भाषा को बच्चों तक सहज तरीके से पहुंचाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 सितंबर से शुरू हुआ था। पांच दिनों तक चले इस आयोजन में प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी पढ़ाने की तकनीक, विद्यार्थियों की भाषा के प्रति रुचि विकसित करने के तरीके तथा कक्षा में अंग्रेजी के व्यावहारिक इस्तेमाल जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे तरीकों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से छोटे बच्चों के लिए अंग्रेजी सीखना बोझिल न होकर सहज और रुचिकर बनाया जा सके।
शिक्षण को व्यवहारिक बनाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि प्राथमिक कक्षाओं में अंग्रेजी भाषा सिखाते समय कठिन शब्दावली और जटिल तरीकों की जगह रोजमर्रा के जीवन से जुड़े उदाहरणों का उपयोग अधिक प्रभावी हो सकता है। बच्चों को उनके आसपास की चीजों, दैनिक गतिविधियों और सामान्य बातचीत से जोड़कर अंग्रेजी सिखाने पर जोर दिया गया।
आयोजकों के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर भाषा की मजबूत नींव तैयार करना विद्यार्थियों के आगे के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में शिक्षकों को केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित रहने के बजाय विद्यार्थियों में भाषा के प्रति आत्मविश्वास और रुचि पैदा करने की दिशा में भी काम करना चाहिए।
समापन समारोह में अधिकारियों की मौजूदगी
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चूड़ामणि बारिक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शिक्षकों को संबोधित करते हुए अंग्रेजी भाषा के व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में अंग्रेजी का इस्तेमाल शिक्षा के साथ-साथ रोजमर्रा के कई क्षेत्रों में भी देखने को मिलता है। इसलिए प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को अंग्रेजी के प्रति सहज बनाने की जरूरत है।
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपनी नियमित शिक्षण प्रक्रिया में सरल अंग्रेजी शब्दों और छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग बढ़ाएं। उनका जोर इस बात पर रहा कि शिक्षक यदि स्वयं कक्षा में व्यवहारिक रूप से अंग्रेजी का इस्तेमाल करेंगे तो बच्चों में भी इस भाषा को लेकर झिझक कम होगी और वे धीरे-धीरे इसका प्रयोग करने के लिए प्रेरित होंगे।
चूड़ामणि बारिक ने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को विद्यालयों की कक्षाओं में लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आती है, जब प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों का इस्तेमाल विद्यार्थियों के बीच किया जाए।
शिक्षक प्रशिक्षण की भूमिका पर चर्चा
बौध की ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गायत्री साहू कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी भाषा के शिक्षण को बेहतर बनाने में शिक्षक प्रशिक्षण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि समय के साथ शिक्षण पद्धतियों में बदलाव जरूरी है। बच्चों की सीखने की क्षमता और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को नए तरीकों को अपनाना चाहिए। नियमित प्रशिक्षण शिक्षकों को कक्षा की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी शिक्षण शैली को विकसित करने का अवसर देता है।
उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों से आग्रह किया कि वे यहां प्राप्त अनुभवों और नई तकनीकों को अपने-अपने विद्यालयों में लागू करें तथा विद्यार्थियों को अंग्रेजी सीखने के लिए प्रोत्साहित करें।
प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी
जिला विज्ञान निरीक्षक जयंत कुमार प्रधान ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने पांच दिवसीय प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं और इसके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों द्वारा दिखाई गई रुचि और सहभागिता का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी से ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता और बढ़ जाती है।
सहायक जिला विज्ञान निरीक्षक प्रबीन कुमार प्रधान ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग प्रदान किया। प्रशिक्षण को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने में उनकी भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण देने के लिए अर्जुन कन्हारा, प्रकाश मेहर, सत्यजीत मिश्रा और अमल कुमार प्रधान ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने शिक्षकों को अंग्रेजी भाषा शिक्षण से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी दी और कक्षा में अपनाई जा सकने वाली व्यावहारिक विधियों पर चर्चा की।
इसके अलावा रंजन कुमार सामल और ज्योतिष मेहर ने मास्टर रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रशिक्षणार्थियों के साथ अपने अनुभव और ज्ञान साझा किए। प्रशिक्षण सत्रों में शिक्षकों को भाषा शिक्षण के विभिन्न तरीकों से परिचित कराया गया और प्राथमिक कक्षाओं के अनुरूप शिक्षण गतिविधियों पर चर्चा की गई।
शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
समापन सत्र में प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर दिया गया। शिक्षकों ने पांच दिनों के दौरान प्राप्त जानकारी और नए कौशल के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। कई शिक्षकों ने माना कि प्रशिक्षण से उन्हें अंग्रेजी भाषा को बच्चों के बीच अधिक सरल तरीके से प्रस्तुत करने के नए तरीके समझने में मदद मिली।
शिक्षकों के अनुसार, प्राथमिक कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाते समय बच्चों के स्तर और उनकी समझ को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। यदि भाषा को गतिविधियों, बातचीत और रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से सिखाया जाए तो बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज हो सकती है।
प्रशिक्षणार्थियों ने यह भी कहा कि कार्यक्रम के दौरान मिली जानकारी को वे अपने विद्यालयों में लागू करने का प्रयास करेंगे। इससे विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा को लेकर रुचि बढ़ाने और उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
प्राथमिक शिक्षा में भाषा कौशल को मजबूत करने की पहल
बौध में आयोजित यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्राथमिक शिक्षा में भाषा कौशल को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों को भाषा की बुनियादी समझ विकसित कराने में शिक्षक की भूमिका अहम होती है। ऐसे में शिक्षकों को लगातार नई शिक्षण तकनीकों से परिचित कराना शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को अंग्रेजी को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय कक्षा की सामान्य गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दिया गया। इससे बच्चों को अंग्रेजी सुनने, समझने और धीरे-धीरे बोलने का अवसर मिल सकता है।
समापन समारोह में मौजूद अधिकारियों, प्रशिक्षकों और शिक्षकों ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। कार्यक्रम के दौरान प्राप्त अनुभवों को विद्यालयों तक पहुंचाने और विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी शिक्षण को अधिक उपयोगी बनाने पर विशेष जोर रहा।
इस प्रकार पांच दिनों तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन केवल औपचारिक आयोजन के साथ नहीं हुआ, बल्कि इसमें शामिल शिक्षकों को प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी शिक्षण को अधिक सरल, व्यावहारिक और बच्चों की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में नए दृष्टिकोण भी मिले। अब इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को विद्यालयों की नियमित कक्षाओं में किस तरह लागू किया जाता है, यह विद्यार्थियों के सीखने के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।