राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मनाया गुरु वंदन समारोह, सेवानिवृत्त शिक्षकों को किया सम्मानित

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। शिक्षक समाज को दिशा देने और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से रविवार को आर्यन पब्लिक स्कूल में गुरु वंदन एवं सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संगठन की गतिविधियों, शिक्षक हितों और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। समारोह के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने की, जबकि संचालन जिला महामंत्री इलयास मंसूरी ने किया। समारोह में लोकतंत्र सेनानी एवं संगठन के संस्थापक सदस्य राजाराम व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए समाज में शिक्षक की भूमिका पर अपने विचार रखे।

संगठन की गतिविधियों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की पिछले सत्र की गतिविधियों की समीक्षा की गई। सत्र 2025-26 के आय-व्यय का विवरण सदस्यों के सामने रखा गया। संगठन की कार्यप्रणाली और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी पदाधिकारियों तथा शिक्षकों ने विचार-विमर्श किया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने के साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाया जाए। शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सामूहिक रूप से कार्य करने की आवश्यकता भी बताई गई।

पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी शिक्षक संगठन की मजबूती उसके सदस्यों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। इसलिए संगठन की गतिविधियों को विद्यालय स्तर तक प्रभावी बनाने और अधिक से अधिक शिक्षकों को इससे जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित रहा समारोह

समारोह का प्रमुख आकर्षण गुरु वंदन कार्यक्रम रहा। इसमें शिक्षकों के प्रति सम्मान और समाज निर्माण में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं माना गया, बल्कि उसे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक माना गया है।

मुख्य अतिथि राजाराम व्यास ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं और शिक्षक उन्हें जिस प्रकार संस्कार एवं शिक्षा देता है, उसी के अनुरूप उनका व्यक्तित्व विकसित होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति भावना विकसित करना भी उसकी भूमिका का हिस्सा है।

उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शिक्षक हितों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जब अपने कार्य और जिम्मेदारियों के प्रति संतुष्ट होकर समर्पण के साथ काम करता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

गुरु वंदन एवं सम्मान समारोह के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान, बद्री प्रसाद झा, वीरेंद्र सिंह चौहान, शकील अहमद और मुन्नी देवी शामिल रहे। सभी सम्मानित शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिह्न भेंट कर उनके लंबे शैक्षिक योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।

सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के प्रति उपस्थित शिक्षकों ने भी सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में कहा गया कि सेवानिवृत्ति सरकारी सेवा की औपचारिक समाप्ति हो सकती है, लेकिन शिक्षक के अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता समाज में हमेशा बनी रहती है। अनुभवी शिक्षकों का ज्ञान नई पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी संगठन से जुड़े रहने का संकल्प

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका संगठन के प्रति समर्पण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक जीवन में प्राप्त अनुभवों का उपयोग समाज और संगठन के हित में करते रहना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने शिक्षकों से संगठन को मजबूत करने और आपसी सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। शिक्षकों की एकजुटता न केवल उनके हितों की आवाज को मजबूत करती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बेहतर बदलाव के लिए भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।

शिक्षक हित और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि संगठन लगातार शिक्षक हितों और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं, जिनका समाधान शिक्षकों, अभिभावकों, प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने के साथ-साथ विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने की दिशा में भी संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक को आवश्यक सहयोग और सम्मान मिलना जरूरी है।

बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद

समारोह में जिला संरक्षक अखिलेश अवस्थी, तनवीर अहमद, विकास कुमार सहित राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने संगठन की आगामी गतिविधियों को लेकर भी अपने सुझाव साझा किए।

पूरे आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षक सम्मान और शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी। सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान कर संगठन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षकों का अनुभव और योगदान समाज के लिए मूल्यवान है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों और शिक्षकों ने संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने तथा शिक्षक हितों से जुड़े विषयों पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया। गुरु वंदन समारोह ने जहां सेवानिवृत्त शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, वहीं नई पीढ़ी के शिक्षकों को भी अपने दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।

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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मनाया गुरु वंदन समारोह, सेवानिवृत्त शिक्षकों को किया सम्मानित

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 27, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। शिक्षक समाज को दिशा देने और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से रविवार को आर्यन पब्लिक स्कूल में गुरु वंदन एवं सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संगठन की गतिविधियों, शिक्षक हितों और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। समारोह के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने की, जबकि संचालन जिला महामंत्री इलयास मंसूरी ने किया। समारोह में लोकतंत्र सेनानी एवं संगठन के संस्थापक सदस्य राजाराम व्यास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए समाज में शिक्षक की भूमिका पर अपने विचार रखे।

संगठन की गतिविधियों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की पिछले सत्र की गतिविधियों की समीक्षा की गई। सत्र 2025-26 के आय-व्यय का विवरण सदस्यों के सामने रखा गया। संगठन की कार्यप्रणाली और आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी पदाधिकारियों तथा शिक्षकों ने विचार-विमर्श किया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाने के साथ ही संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाया जाए। शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सामूहिक रूप से कार्य करने की आवश्यकता भी बताई गई।

पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी शिक्षक संगठन की मजबूती उसके सदस्यों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। इसलिए संगठन की गतिविधियों को विद्यालय स्तर तक प्रभावी बनाने और अधिक से अधिक शिक्षकों को इससे जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित रहा समारोह

समारोह का प्रमुख आकर्षण गुरु वंदन कार्यक्रम रहा। इसमें शिक्षकों के प्रति सम्मान और समाज निर्माण में उनके योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं माना गया, बल्कि उसे विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक माना गया है।

मुख्य अतिथि राजाराम व्यास ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं और शिक्षक उन्हें जिस प्रकार संस्कार एवं शिक्षा देता है, उसी के अनुरूप उनका व्यक्तित्व विकसित होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति भावना विकसित करना भी उसकी भूमिका का हिस्सा है।

उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शिक्षक हितों के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण की भावना को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक जब अपने कार्य और जिम्मेदारियों के प्रति संतुष्ट होकर समर्पण के साथ काम करता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

गुरु वंदन एवं सम्मान समारोह के दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इनमें जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान, बद्री प्रसाद झा, वीरेंद्र सिंह चौहान, शकील अहमद और मुन्नी देवी शामिल रहे। सभी सम्मानित शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिह्न भेंट कर उनके लंबे शैक्षिक योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।

सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों के प्रति उपस्थित शिक्षकों ने भी सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में कहा गया कि सेवानिवृत्ति सरकारी सेवा की औपचारिक समाप्ति हो सकती है, लेकिन शिक्षक के अनुभव और मार्गदर्शन की आवश्यकता समाज में हमेशा बनी रहती है। अनुभवी शिक्षकों का ज्ञान नई पीढ़ी के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।

सेवानिवृत्ति के बाद भी संगठन से जुड़े रहने का संकल्प

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका संगठन के प्रति समर्पण बना रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक जीवन में प्राप्त अनुभवों का उपयोग समाज और संगठन के हित में करते रहना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

उन्होंने शिक्षकों से संगठन को मजबूत करने और आपसी सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर सकारात्मक सोच के साथ काम करने की आवश्यकता है। शिक्षकों की एकजुटता न केवल उनके हितों की आवाज को मजबूत करती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बेहतर बदलाव के लिए भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करती है।

शिक्षक हित और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि संगठन लगातार शिक्षक हितों और शिक्षा की गुणवत्ता के लिए काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं, जिनका समाधान शिक्षकों, अभिभावकों, प्रशासन और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने के साथ-साथ विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने की दिशा में भी संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक को आवश्यक सहयोग और सम्मान मिलना जरूरी है।

बड़ी संख्या में शिक्षक रहे मौजूद

समारोह में जिला संरक्षक अखिलेश अवस्थी, तनवीर अहमद, विकास कुमार सहित राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने संगठन की आगामी गतिविधियों को लेकर भी अपने सुझाव साझा किए।

पूरे आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षक सम्मान और शिक्षा के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी। सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान कर संगठन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक सेवा देने वाले शिक्षकों का अनुभव और योगदान समाज के लिए मूल्यवान है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों और शिक्षकों ने संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने तथा शिक्षक हितों से जुड़े विषयों पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया। गुरु वंदन समारोह ने जहां सेवानिवृत्त शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया, वहीं नई पीढ़ी के शिक्षकों को भी अपने दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया।