अतिवृष्टि से फसल और मकानों को नुकसान, मुआवजे की मांग को लेकर बसपा ने सौंपा ज्ञापन

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जिले में हाल के दिनों में हुई तेज बारिश और आंधी-तूफान ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूर परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ कई स्थानों पर कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी शिकायतें सामने आई हैं। प्रभावित लोगों को राहत और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।

बसपा जिलाध्यक्ष डा. बृजेश जाटव के नेतृत्व में पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के सामने अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों और गरीब परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बारिश और तेज हवाओं के कारण कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर शीघ्र सर्वे और नुकसान का वास्तविक आकलन कराया जाना आवश्यक है।

खेतों में खड़ी फसलों को हुआ नुकसान

ज्ञापन के माध्यम से बसपा नेताओं ने बताया कि मौसम की मार का असर खरीफ की विभिन्न फसलों पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में ज्वार, बाजरा, धान, उर्द और तिल की फसलें प्रभावित होने की बात कही गई है। किसानों के लिए फसल तैयार होने का समय आमदनी की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर उनकी मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा दोनों प्रभावित होते हैं।

पार्टी पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों में राजस्व विभाग की टीमों को भेजकर खेतवार सर्वे कराया जाए। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन मौके पर जाकर किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

तत्काल सर्वे कराने की मांग

बसपा प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में विशेष रूप से मांग उठाई कि बारिश से प्रभावित इलाकों में सर्वे का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। नेताओं का कहना था कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत राशि प्राप्त करने के लिए नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार होना जरूरी है। इसलिए संबंधित विभागों की टीमों को गांव-गांव भेजकर फसल क्षति का विवरण तैयार कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से ही खेती की लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के कारण दबाव में रहती है। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। यदि समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध हो, तो प्रभावित परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सकती है।

कच्चे मकानों के नुकसान का भी उठाया मुद्दा

ज्ञापन में केवल फसलों की क्षति तक ही मांग सीमित नहीं रही। बसपा नेताओं ने बारिश के कारण गरीब और मजदूर परिवारों के कच्चे मकानों को हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रशासन के सामने रखा। उनका कहना था कि तेज बारिश के दौरान कई कमजोर मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे गरीब परिवारों के सामने रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है।

पार्टी की ओर से मांग की गई कि जिन परिवारों के मकान बारिश और आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका भी अलग से सर्वे कराया जाए। प्रशासन द्वारा क्षति का आकलन करने के बाद पात्र परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने आवास की मरम्मत करा सकें और सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

किसानों और मजदूरों को राहत देने पर जोर

बसपा नेताओं ने कहा कि प्राकृतिक आपदा का प्रभाव केवल खेत तक सीमित नहीं रहता। किसान की फसल खराब होने से उसकी आय प्रभावित होती है, जबकि ग्रामीण मजदूर और गरीब परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त होने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ खड़ा हो जाता है। ऐसे में राहत कार्यों को व्यापक स्तर पर संचालित किए जाने की जरूरत है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। उनका कहना था कि सर्वे में किसी भी पात्र किसान या प्रभावित परिवार का नाम छूटना नहीं चाहिए। साथ ही नुकसान का आकलन पारदर्शी तरीके से किए जाने की मांग भी रखी गई।

प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा

मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए बसपा पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान के संबंध में संबंधित विभागों को सक्रिय किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय रहते राहत मिल सके।

उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसल पर पूरे वर्ष की मेहनत और पूंजी लगाता है। मौसम की अचानक मार से यदि फसल नष्ट हो जाती है, तो उसका असर पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए नुकसान की स्थिति में सरकारी सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसी तरह गरीब परिवारों के लिए मकान को नुकसान पहुंचना भी बड़ी समस्या है। ऐसे परिवारों के पास घर की मरम्मत कराने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। इसलिए बसपा ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे परिवारों की पहचान कर उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता दिलाई जाए।

ये लोग रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान बसपा के माधौगढ़ विधानसभा प्रत्याशी आशीष पांडेय, कालपी विधानसभा प्रत्याशी वीरपाल सिंह चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय गौतम, रामसनेही बाबू जी, कीरत सिंह दोहरे, रामऔतार यादव, उदय दिलाया, शैलेन्द्र शिरोमणि, राजेश जाटव, अमित भारती, भगवती शरण पांचाल सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बसपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों और गरीब परिवारों के हित में जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब प्रभावित ग्रामीणों की नजर प्रशासन द्वारा कराए जाने वाले सर्वे और उसके बाद मिलने वाली संभावित राहत पर है।

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अतिवृष्टि से फसल और मकानों को नुकसान, मुआवजे की मांग को लेकर बसपा ने सौंपा ज्ञापन

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:सितम्बर 29, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जिले में हाल के दिनों में हुई तेज बारिश और आंधी-तूफान ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और मजदूर परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में खड़ी खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचने के साथ कई स्थानों पर कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की भी शिकायतें सामने आई हैं। प्रभावित लोगों को राहत और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।

बसपा जिलाध्यक्ष डा. बृजेश जाटव के नेतृत्व में पहुंचे पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के सामने अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों और गरीब परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बारिश और तेज हवाओं के कारण कई गांवों में खेतों में खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर शीघ्र सर्वे और नुकसान का वास्तविक आकलन कराया जाना आवश्यक है।

खेतों में खड़ी फसलों को हुआ नुकसान

ज्ञापन के माध्यम से बसपा नेताओं ने बताया कि मौसम की मार का असर खरीफ की विभिन्न फसलों पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में ज्वार, बाजरा, धान, उर्द और तिल की फसलें प्रभावित होने की बात कही गई है। किसानों के लिए फसल तैयार होने का समय आमदनी की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, लेकिन प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर उनकी मेहनत और खेती में लगाया गया पैसा दोनों प्रभावित होते हैं।

पार्टी पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों में राजस्व विभाग की टीमों को भेजकर खेतवार सर्वे कराया जाए। उनका कहना है कि नुकसान का आकलन मौके पर जाकर किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

तत्काल सर्वे कराने की मांग

बसपा प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में विशेष रूप से मांग उठाई कि बारिश से प्रभावित इलाकों में सर्वे का कार्य जल्द शुरू कराया जाए। नेताओं का कहना था कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत राशि प्राप्त करने के लिए नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार होना जरूरी है। इसलिए संबंधित विभागों की टीमों को गांव-गांव भेजकर फसल क्षति का विवरण तैयार कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से ही खेती की लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के कारण दबाव में रहती है। ऐसे में फसल खराब होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। यदि समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध हो, तो प्रभावित परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सकती है।

कच्चे मकानों के नुकसान का भी उठाया मुद्दा

ज्ञापन में केवल फसलों की क्षति तक ही मांग सीमित नहीं रही। बसपा नेताओं ने बारिश के कारण गरीब और मजदूर परिवारों के कच्चे मकानों को हुए नुकसान का मुद्दा भी प्रशासन के सामने रखा। उनका कहना था कि तेज बारिश के दौरान कई कमजोर मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे गरीब परिवारों के सामने रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है।

पार्टी की ओर से मांग की गई कि जिन परिवारों के मकान बारिश और आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका भी अलग से सर्वे कराया जाए। प्रशासन द्वारा क्षति का आकलन करने के बाद पात्र परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपने आवास की मरम्मत करा सकें और सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

किसानों और मजदूरों को राहत देने पर जोर

बसपा नेताओं ने कहा कि प्राकृतिक आपदा का प्रभाव केवल खेत तक सीमित नहीं रहता। किसान की फसल खराब होने से उसकी आय प्रभावित होती है, जबकि ग्रामीण मजदूर और गरीब परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त होने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ खड़ा हो जाता है। ऐसे में राहत कार्यों को व्यापक स्तर पर संचालित किए जाने की जरूरत है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए। उनका कहना था कि सर्वे में किसी भी पात्र किसान या प्रभावित परिवार का नाम छूटना नहीं चाहिए। साथ ही नुकसान का आकलन पारदर्शी तरीके से किए जाने की मांग भी रखी गई।

प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा

मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए बसपा पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा। पार्टी नेताओं ने कहा कि बारिश से हुए नुकसान के संबंध में संबंधित विभागों को सक्रिय किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय रहते राहत मिल सके।

उन्होंने कहा कि किसान अपनी फसल पर पूरे वर्ष की मेहनत और पूंजी लगाता है। मौसम की अचानक मार से यदि फसल नष्ट हो जाती है, तो उसका असर पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर पड़ता है। इसलिए नुकसान की स्थिति में सरकारी सहायता किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसी तरह गरीब परिवारों के लिए मकान को नुकसान पहुंचना भी बड़ी समस्या है। ऐसे परिवारों के पास घर की मरम्मत कराने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते। इसलिए बसपा ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे परिवारों की पहचान कर उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार सहायता दिलाई जाए।

ये लोग रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान बसपा के माधौगढ़ विधानसभा प्रत्याशी आशीष पांडेय, कालपी विधानसभा प्रत्याशी वीरपाल सिंह चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय गौतम, रामसनेही बाबू जी, कीरत सिंह दोहरे, रामऔतार यादव, उदय दिलाया, शैलेन्द्र शिरोमणि, राजेश जाटव, अमित भारती, भगवती शरण पांचाल सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बसपा प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों और गरीब परिवारों के हित में जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब प्रभावित ग्रामीणों की नजर प्रशासन द्वारा कराए जाने वाले सर्वे और उसके बाद मिलने वाली संभावित राहत पर है।