जालौन में पारंपरिक खेती के साथ बढ़ेगी खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर की खेती, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। बुंदेलखंड के जालौन जिले में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और नई आय देने वाली फसलों से जोड़ने की तैयारी तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों, बाजार की मांग और किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपेक्षाकृत नई फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके अलावा फल, सब्जी, मसाला, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी समीर की अध्यक्षता में आयोजित जिला औद्यानिक मिशन समिति, जनपद स्तरीय क्रियान्वयन समिति तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित विभिन्न योजनाओं के भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

नई फसलों के जरिए आय के विकल्प बढ़ाने की तैयारी

बैठक में जिला उद्यान अधिकारी ने जिले में संचालित और प्रस्तावित औद्यानिक गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों के सामने रखी। बताया गया कि किसानों को स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, नींबू-मुसम्मी, अनार, पपीता, आंवला और कटहल जैसी फसलों की ओर आकर्षित किया जाएगा।

इसके साथ ही शाकभाजी उत्पादन, प्याज, लहसुन, विभिन्न मसाला फसलें, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। खेती को आधुनिक बनाने के लिए किसानों को कृषि यंत्रों, स्प्रेयर, मचान, मल्चिंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की बात कही गई।

प्रशासन का जोर ऐसे विकल्प विकसित करने पर है, जिनसे किसान केवल एक पारंपरिक फसल पर निर्भर न रहें। अलग-अलग मौसम और बाजार की मांग के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग को बनाया जाएगा आधार

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के बीच उन्हीं फसलों को प्राथमिकता के साथ बढ़ावा दिया जाए, जो क्षेत्र की जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुकूल हों तथा जिनकी बाजार में मांग उपलब्ध हो। उन्होंने खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपरंपरागत बागवानी फसलों पर विशेष ध्यान देने को कहा।

इसके अलावा अदरक, हल्दी, शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी फसलों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। इन फसलों को किसानों के लिए संभावित व्यावसायिक विकल्प के रूप में विकसित करने पर चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने योजनाओं को अलग-अलग किसानों तक सीमित रखने के बजाय क्लस्टर आधारित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि एक क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान समान या संबंधित फसलों का उत्पादन करेंगे तो उत्पादन, तकनीकी मार्गदर्शन, विपणन और प्रसंस्करण को व्यवस्थित करने में आसानी हो सकती है।

3400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य

बैठक में बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना के अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य कराने के लक्ष्य पर चर्चा हुई। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ कार्यक्रम के तहत 3400 हेक्टेयर क्षेत्र को लक्ष्य में शामिल किया गया है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिंचाई के पानी का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करते हुए कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने की दिशा में किसानों को प्रोत्साहित करना है। अधिकारियों से कहा गया कि योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाए और पात्र लाभार्थियों को प्रक्रिया के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना से 861 इकाइयों पर जोर

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 861 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य पर भी बैठक में चर्चा हुई। योजना के अंतर्गत पात्र इकाइयों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान सहायता का प्रावधान बताया गया।

औद्यानिक फसलों के उत्पादन के साथ यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां विकसित होती हैं तो किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रशासन ने औद्यानिक उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों से अचार, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पैकेजिंग और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी पर जोर

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों के साथ महिला कृषकों और स्वयं सहायता समूहों को भी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल सीमित संख्या में किसानों तक न रह जाए, बल्कि पात्र वर्गों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने और खेती में गुणवत्तापूर्ण बीज तथा रोपण सामग्री उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसानों तक पहुंचने वाली पौध और अन्य रोपण सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।

औषधीय फसलों को बाजार से जोड़ने की तैयारी

बैठक में औषधीय फसलों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। प्रशासन ने संबंधित कंपनियों और किसानों के बीच संवाद स्थापित कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को औषधीय फसलों की बाजार संभावनाओं और आवश्यकताओं की जानकारी मिल सके।

इस तरह की पहल से उत्पादन के साथ बाजार की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को किसी फसल की खेती शुरू करने से पहले उसके उत्पादन, तकनीक, बाजार और प्रसंस्करण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

हाईटेक नर्सरी से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण पौध

मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह ने हाईटेक नर्सरी को जल्द संचालित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण शाकभाजी पौध उपलब्ध कराना है। बेहतर पौध सामग्री मिलने से किसानों को उत्पादन की शुरुआती अवस्था में गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों ने किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने, योजनाओं के प्रति जागरूक करने और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर फोकस

जालौन में बागवानी को बढ़ावा देने की इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि आधारित रोजगार के अवसर विकसित करना भी है। केवल खेत में उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और अन्य संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।

यदि उत्पादन के साथ स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था मजबूत होती है तो किसानों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

बैठक में परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी ए.के. सिंह, जिला कृषि अधिकारी जी.डी. सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।

जिला प्रशासन की ओर से योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने, अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने और बागवानी आधारित गतिविधियों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी नई फसलों के साथ पारंपरिक फल-सब्जियों और मसाला फसलों को प्रोत्साहन देने की यह पहल जालौन में कृषि विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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जालौन में पारंपरिक खेती के साथ बढ़ेगी खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर की खेती, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 1, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

जालौन। बुंदेलखंड के जालौन जिले में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बागवानी और नई आय देने वाली फसलों से जोड़ने की तैयारी तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों, बाजार की मांग और किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपेक्षाकृत नई फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसके अलावा फल, सब्जी, मसाला, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी समीर की अध्यक्षता में आयोजित जिला औद्यानिक मिशन समिति, जनपद स्तरीय क्रियान्वयन समिति तथा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना समिति की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित विभिन्न योजनाओं के भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

नई फसलों के जरिए आय के विकल्प बढ़ाने की तैयारी

बैठक में जिला उद्यान अधिकारी ने जिले में संचालित और प्रस्तावित औद्यानिक गतिविधियों की जानकारी अधिकारियों के सामने रखी। बताया गया कि किसानों को स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, खजूर, नींबू-मुसम्मी, अनार, पपीता, आंवला और कटहल जैसी फसलों की ओर आकर्षित किया जाएगा।

इसके साथ ही शाकभाजी उत्पादन, प्याज, लहसुन, विभिन्न मसाला फसलें, मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन को भी प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई है। खेती को आधुनिक बनाने के लिए किसानों को कृषि यंत्रों, स्प्रेयर, मचान, मल्चिंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की बात कही गई।

प्रशासन का जोर ऐसे विकल्प विकसित करने पर है, जिनसे किसान केवल एक पारंपरिक फसल पर निर्भर न रहें। अलग-अलग मौसम और बाजार की मांग के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के रास्ते तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग को बनाया जाएगा आधार

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के बीच उन्हीं फसलों को प्राथमिकता के साथ बढ़ावा दिया जाए, जो क्षेत्र की जलवायु और कृषि परिस्थितियों के अनुकूल हों तथा जिनकी बाजार में मांग उपलब्ध हो। उन्होंने खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी अपरंपरागत बागवानी फसलों पर विशेष ध्यान देने को कहा।

इसके अलावा अदरक, हल्दी, शिमला मिर्च, बैंगन और टमाटर जैसी फसलों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई। इन फसलों को किसानों के लिए संभावित व्यावसायिक विकल्प के रूप में विकसित करने पर चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने योजनाओं को अलग-अलग किसानों तक सीमित रखने के बजाय क्लस्टर आधारित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि एक क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान समान या संबंधित फसलों का उत्पादन करेंगे तो उत्पादन, तकनीकी मार्गदर्शन, विपणन और प्रसंस्करण को व्यवस्थित करने में आसानी हो सकती है।

3400 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई दक्षता बढ़ाने का लक्ष्य

बैठक में बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र में औद्यानिक विकास योजना के अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य कराने के लक्ष्य पर चर्चा हुई। वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ कार्यक्रम के तहत 3400 हेक्टेयर क्षेत्र को लक्ष्य में शामिल किया गया है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिंचाई के पानी का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करते हुए कृषि उत्पादन को बेहतर बनाने की दिशा में किसानों को प्रोत्साहित करना है। अधिकारियों से कहा गया कि योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाए और पात्र लाभार्थियों को प्रक्रिया के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना से 861 इकाइयों पर जोर

खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना के तहत 861 इकाइयों की स्थापना के लक्ष्य पर भी बैठक में चर्चा हुई। योजना के अंतर्गत पात्र इकाइयों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान सहायता का प्रावधान बताया गया।

औद्यानिक फसलों के उत्पादन के साथ यदि स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां विकसित होती हैं तो किसानों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के अवसर मिल सकते हैं। इसी उद्देश्य से प्रशासन ने औद्यानिक उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों से अचार, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, पैकेजिंग और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने जैसी गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी पर जोर

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के किसानों के साथ महिला कृषकों और स्वयं सहायता समूहों को भी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उनका जोर इस बात पर रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल सीमित संख्या में किसानों तक न रह जाए, बल्कि पात्र वर्गों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

इसके साथ किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने और खेती में गुणवत्तापूर्ण बीज तथा रोपण सामग्री उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि किसानों तक पहुंचने वाली पौध और अन्य रोपण सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।

औषधीय फसलों को बाजार से जोड़ने की तैयारी

बैठक में औषधीय फसलों को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। प्रशासन ने संबंधित कंपनियों और किसानों के बीच संवाद स्थापित कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को औषधीय फसलों की बाजार संभावनाओं और आवश्यकताओं की जानकारी मिल सके।

इस तरह की पहल से उत्पादन के साथ बाजार की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को किसी फसल की खेती शुरू करने से पहले उसके उत्पादन, तकनीक, बाजार और प्रसंस्करण से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

हाईटेक नर्सरी से मिलेगी गुणवत्तापूर्ण पौध

मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह ने हाईटेक नर्सरी को जल्द संचालित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण शाकभाजी पौध उपलब्ध कराना है। बेहतर पौध सामग्री मिलने से किसानों को उत्पादन की शुरुआती अवस्था में गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों ने किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने, योजनाओं के प्रति जागरूक करने और पात्र लाभार्थियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर फोकस

जालौन में बागवानी को बढ़ावा देने की इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि आधारित रोजगार के अवसर विकसित करना भी है। केवल खेत में उत्पादन तक सीमित रहने के बजाय प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और अन्य संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।

यदि उत्पादन के साथ स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था मजबूत होती है तो किसानों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

बैठक में परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, वरिष्ठ कोषाधिकारी ए.के. सिंह, जिला कृषि अधिकारी जी.डी. सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।

जिला प्रशासन की ओर से योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने, अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने और बागवानी आधारित गतिविधियों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया। खजूर, ड्रैगन फ्रूट और अंजीर जैसी नई फसलों के साथ पारंपरिक फल-सब्जियों और मसाला फसलों को प्रोत्साहन देने की यह पहल जालौन में कृषि विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।