फ़रवरी 14, 2026

शंकरगढ़, प्रयागराज में हाई-वोल्टेज केबल से टच हुआ ट्रक: जन सुरक्षा पर उठे सवाल, बिजली विभाग की लापरवाही उजागर

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Anoop singh

प्रयागराज, जून 2025 — शंकरगढ़ क्षेत्र में सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब एक भारी ट्रक चलते-चलते सड़क के किनारे गुजर रही 1,10,00 वोल्ट की विद्युत लाइन से टकरा गया। घटना के समय ट्रक बाजार मार्ग से होकर जा रहा था और अचानक उसका ऊपरी हिस्सा हाई-वोल्टेज बिजली की केबल से छू गया। सौभाग्यवश कोई बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने बिजली विभाग की लापरवाही और जन सुरक्षा के इंतज़ामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

⚡ हादसे का विवरण:

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक सामान्य ऊँचाई का था और बाजार से होते हुए नियमित मार्ग पर जा रहा था। जैसे ही वह केबल के नीचे से गुज़रा, उसके ऊपरी हिस्से ने हाई टेंशन लाइन को छू लिया, जिससे जोरदार चिंगारियाँ निकलीं और ट्रक का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। ट्रक ड्राइवर ने तत्काल वाहन को रोक दिया और गनीमत रही कि वाहन में कोई आग नहीं लगी।

🔍 कहाँ है जिम्मेदारी?

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने इसे बिजली विभाग की घोर लापरवाही बताया है। लोगों का कहना है कि:

हाई वोल्टेज लाइनें ज़मीन से बेहद कम ऊँचाई पर लटकी हुई हैं।

किसी भी प्रकार का चेतावनी बोर्ड या ऊँचाई सीमित करने वाला संकेत वहाँ मौजूद नहीं है।

कई बार प्रशासन को इस समस्या की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

🗣️ जनता की आवाज़:

स्थानीय दुकानदार शैलेश कुमार ने बताया, “यह कोई पहली घटना नहीं है। कई बार छोटे वाहन इन तारों से बाल-बाल बचे हैं। अगर यह ट्रक भरा हुआ होता या तार फट जाता, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।”

एक अन्य नागरिक, ममता देवी ने कहा, “बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की यह लापरवाही जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। हमें तत्काल सुरक्षित समाधान चाहिए।”

⚠️ प्रशासन की प्रतिक्रिया:

अब तक बिजली विभाग या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न ही मौके पर निरीक्षण के लिए कोई टीम पहुँची है। घटना के बाद क्षेत्र में अस्थाई रूप से विद्युत आपूर्ति बाधित की गई।

🚨 क्या होना चाहिए अगला कदम?

  1. सभी हाई वोल्टेज लाइनों की ऊँचाई की जांच और मापदंडों के अनुसार पुनः स्थापना।
  2. जनसुरक्षा के लिए चेतावनी बोर्ड और ऊँचाई नियंत्रक गेट की स्थापना।
  3. जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित को मुआवजा।
  4. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत सुरक्षा ऑडिट की अनिवार्यता।

निष्कर्ष:
शंकरगढ़ की यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का उदाहरण है। यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो भविष्य में यह लापरवाही बड़ी जान-माल की क्षति में बदल सकती है। ज़रूरत है जागरूकता, जवाबदेही और ठोस कार्रवाई की, ताकि जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता मिल सके।


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