फ़रवरी 13, 2026

2026 से साल में दो बार होंगे सीबीएसई कक्षा 10वीं के बोर्ड एग्जाम: छात्रों के हित में बड़ा सुधार

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Anoop singh

नई दिल्ली, जून 2025: भारत की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 से कक्षा 10वीं के बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। यह फैसला छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करने और उन्हें प्रदर्शन सुधारने का अतिरिक्त अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि पहली परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी, जबकि दूसरी परीक्षा वैकल्पिक होगी, जिसमें छात्र केवल उन्हीं विषयों की परीक्षा दोबारा दे सकेंगे, जिनमें वे अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं या नंबर सुधारना चाहते हैं।

नई प्रणाली की मुख्य विशेषताएं:

पहली परीक्षा अनिवार्य, दूसरी वैकल्पिक: छात्रों को साल की पहली परीक्षा में बैठना जरूरी होगा। दूसरी परीक्षा उनके लिए एक अवसर होगी, न कि दबाव।

प्रथम परीक्षा का परिणाम अप्रैल में: इससे छात्रों को समय रहते अपने प्रदर्शन का पता चल सकेगा।

दूसरी परीक्षा का परिणाम जून में: इससे समय की बचत होगी और छात्र पूरे वर्ष बर्बाद किए बिना अपने अंक सुधार सकेंगे।

आंतरिक मूल्यांकन केवल एक बार होगा: यह प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाएगा, जिससे स्कूलों और छात्रों दोनों को राहत मिलेगी।

छात्र-हित में सुधार

सीबीएसई का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और सीखने-केंद्रित बनाने पर जोर देती है। अब छात्रों को एक ही परीक्षा पर निर्भर नहीं रहना होगा, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और मानसिक तनाव में कमी आएगी।

इस दोहरी परीक्षा प्रणाली से विद्यार्थियों को “एक और मौका” मिलेगा, जिससे वे बिना पूरे साल दोहराए अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।

स्कूलों और शिक्षकों के लिए तैयारी की जरूरत

शिक्षण संस्थानों को इस नई व्यवस्था के अनुसार अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में बदलाव करना होगा। छात्रों को भी अब दो चरणों में परीक्षा की तैयारी करनी होगी, जिससे बेहतर योजना और समय प्रबंधन आवश्यक होगा।

निष्कर्ष

CBSE का यह निर्णय भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। जहां एक ओर यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और लचीलापन को प्राथमिकता देता है, वहीं दूसरी ओर यह उन्हें बेहतर सीखने और आत्ममूल्यांकन का अवसर भी देता है।

यह नई व्यवस्था 2026 से लागू होगी और इसके बाद भारत में माध्यमिक शिक्षा एक नई दिशा की ओर बढ़ेगी—जहां छात्र परीक्षा से नहीं, बल्कि सीखने से जुड़ेंगे।


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