फ़रवरी 14, 2026

भारत में मानसून 2025: IMD ने जारी किया वर्षा का ताज़ा नक्शा, जानिए आपके राज्य में कितनी बारिश हो रही है

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Anoop singh

नई दिल्ली, जून 2025: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट mausam.imd.gov.in पर एक अद्यतन मानसून वर्षा मानचित्र प्रकाशित किया है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही वर्षा की स्थिति को दर्शाता है। यह नक्शा भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन श्रेणियों में विभाजित करता है — अधिक वर्षा, मध्यम वर्षा, और कम वर्षा। यह वर्गीकरण न केवल मौसम के रुझानों को स्पष्ट करता है, बल्कि कृषि, जल प्रबंधन और आपदा तैयारियों के लिए भी अहम जानकारी प्रदान करता है।


अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

मानसून की तीव्र बारिश से प्रभावित क्षेत्रों में इस बार दादरा और नगर हवेली, मिज़ोरम, केरल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर शामिल हैं। ये राज्य ऐतिहासिक रूप से मानसूनी सीज़न में प्रचुर वर्षा के लिए जाने जाते हैं। खासकर दक्षिणी समुद्री तटों और पूर्वोत्तर भारत में इस समय भारी वर्षा दर्ज की जा रही है।


मध्यम वर्षा वाले राज्य

देश का एक बड़ा हिस्सा इस समय मध्यम वर्षा की श्रेणी में है। इन राज्यों में गुजरात, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इन क्षेत्रों में संतुलित बारिश से खेती-बाड़ी, जल स्तर और मौसम संतुलन को बनाए रखने में मदद मिल रही है।


कम वर्षा वाले राज्य

कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अभी मानसून की कमी का सामना कर रहे हैं। इनमें ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, त्रिपुरा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, पुदुचेरी, लक्षद्वीप, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और लद्दाख शामिल हैं। यहां पर रुक-रुक कर हल्की वर्षा हो रही है, लेकिन दीर्घकालिक कृषि पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।


मानसून निगरानी का महत्व

IMD द्वारा प्रस्तुत यह नक्शा एक रणनीतिक साधन के रूप में कार्य करता है, जो किसानों, नीति-निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सटीक और त्वरित निर्णय लेने में सहायता करता है। वर्षा की मात्रा और वितरण की जानकारी से यह पता लगाया जा सकता है कि किस क्षेत्र में बाढ़ या सूखा जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं


निरंतर निगरानी की आवश्यकता

चूंकि मानसून एक गतिशील और अस्थिर मौसम प्रणाली है, इसलिए इसकी निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है। IMD समय-समय पर नक्शे और रिपोर्ट अपडेट करता रहेगा, ताकि संभावित अत्यधिक वर्षा या सूखे की स्थितियों से समय रहते निपटा जा सके।


निष्कर्ष:
जहां कुछ राज्य इस मानसून में वर्षा के वरदान का लाभ उठा रहे हैं, वहीं कई क्षेत्र अब भी पर्याप्त बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में मानसून की इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेना और उस पर समयानुकूल कार्रवाई करना सरकार और आम जनता दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।


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