दिल्ली में DRDO के MCC क्लस्टर की पहल: रक्षा नवाचार और उद्योगिक सहभागिता का नया अध्याय

नई दिल्ली, 28 जून 2025 — भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपने माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़, कम्प्यूटेशनल सिस्टम्स और साइबर सिस्टम्स (MCC) क्लस्टर के अंतर्गत एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण इंडस्ट्री इंटरैक्शन मीट का आयोजन किया। यह आयोजन 27 जून को दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी (SSPL) में सम्पन्न हुआ, जिसमें देश की अग्रणी 52 कंपनियों और 100 से अधिक तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
आयोजन का उद्देश्य और महत्व
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य रक्षा अनुसंधान और स्वदेशी उद्योगों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूती देना था। DRDO की यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अंतर्गत अत्यंत सामयिक मानी जा रही है, जहां देश को रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना प्राथमिक लक्ष्य है।
यह मीटिंग वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और औद्योगिक नेताओं के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का मंच बनी, जिससे सह-विकास, तकनीक हस्तांतरण और नवाचार की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
प्रमुख तकनीकी फोकस क्षेत्र
- एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स का विकास
कार्यक्रम में अगली पीढ़ी की सेमीकंडक्टर सामग्रियों जैसे सिलिकॉन कार्बाइड (SiC), गैलियम नाइट्राइड (GaN), और गैलियम आर्सेनाइड (GaAs) पर आधारित डिवाइसेज़ की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। ये सामग्रियाँ उच्च तापमान और विकिरण-प्रभावी वातावरण में भी बेहतर प्रदर्शन देती हैं, जो रक्षा उपकरणों के लिए आवश्यक है।
- सुरक्षित कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आईटी अवसंरचना
डेटा सुरक्षा और स्मार्ट निर्णय लेने की तकनीकों में प्रगति हेतु भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और साइबर-सुरक्षित आईटी ढांचे पर जोर दिया गया। ये पहल भविष्य की युद्ध रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य मानी जा रही हैं।
- AR/VR का रक्षा क्षेत्र में उपयोग
संवर्धित वास्तविकता (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीकों के प्रयोग से रक्षा प्रशिक्षण, सिमुलेशन और मिशन प्लानिंग को अधिक प्रभावी और सजीव बनाया जा सकता है। इन तकनीकों के विस्तार से सैनिकों की दक्षता और निर्णय क्षमता में वृद्धि होगी।
DRDO और उद्योग के बीच सहयोग की नई दिशा
इस कार्यक्रम ने निजी कंपनियों को DRDO की तकनीकी क्षमताओं से परिचित कराया और उनके सामने सह-निर्माण की नई संभावनाएँ खोलीं। औद्योगिक प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए DRDO के साथ दीर्घकालिक साझेदारियों में रुचि दिखाई। यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण भारतीय रक्षा उत्पादों के स्वदेशीकरण और नवाचार को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा।
निष्कर्ष
DRDO द्वारा आयोजित यह इंडस्ट्री इंटरैक्शन मीट भारतीय रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की प्रतीक है। MCC क्लस्टर की यह पहल भारत को न केवल रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि देश को एक वैश्विक तकनीकी शक्ति के रूप में भी स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी। ऐसी साझेदारियाँ भारत को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में निर्णायक कदम हैं।
