केरल विश्वविद्यालय में SFI कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज: छात्रों का आक्रोश और बढ़ता विवाद

तिरुवनंतपुरम (केरल), 9 जुलाई 2025 – केरल विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई उग्र घटनाओं के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी माकपा (CPM) की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के 27 सदस्यों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इनमें संगठन के प्रदेश सचिव पी.एस. संजीव का नाम भी प्रमुख रूप से शामिल है।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में लगभग 1,000 अज्ञात प्रदर्शनकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, जबरन विश्वविद्यालय परिसर में घुसने और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली पुलिस पर हमला करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), केरल पुलिस अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है।
विरोध की पृष्ठभूमि क्या है?
विरोध उस समय भड़का जब राज्यपाल आर. अर्लेकर, जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, के दौरे का छात्रों ने तीव्र विरोध किया। घटनाक्रम तब और हिंसक हो गया जब राज्यपाल के आगमन से पहले ही छात्र कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के गेट को तोड़ने की कोशिश की और पुलिस के साथ तीखी झड़पें हुईं।
छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जबरन प्रवेश किया और “साफ्रोनाइजेशन” (भगवाकरण) के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस की ओर से उन्हें रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वे अंदर घुस गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारी सुरक्षा गियर में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि प्रदर्शनकारी जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे हैं।
राजनीतिक हस्तक्षेप और आरोपों की राजनीति
माकपा के वरिष्ठ नेता और विधायक एम.वी. गोविंदन भी घटनास्थल पर पहुंचे, जिससे यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दिया। विश्वविद्यालय में ‘भारत माता’ की तस्वीर के इस्तेमाल को लेकर SFI की आपत्ति इस विवाद की जड़ बताई जा रही है। उनका कहना है कि यह एक तरह से विश्वविद्यालयों में सांप्रदायिक एजेंडे को थोपने की कोशिश है।
इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने कुलपति मोहनन कुन्नुम्माल को निलंबित करने की मांग की, साथ ही 2 जुलाई को केरल डिजिटल विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सिजा थॉमस को केरल विश्वविद्यालय का कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किए जाने के निर्णय का भी कड़ा विरोध किया।
राज्यपाल अर्लेकर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से स्पष्ट किया कि “डॉ. मोहनन कुन्नुम्माल की अनुपस्थिति के दौरान 3 से 8 जुलाई 2025 तक डॉ. सिजा थॉमस को केरल विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर सभी शक्तियों और कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश दिया गया है।”
निष्कर्ष
केरल विश्वविद्यालय में उठा यह विवाद सिर्फ छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की व्यापक राजनीतिक और वैचारिक टकराहट का प्रतीक बनता जा रहा है। SFI कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और राज्यपाल की भूमिका दोनों पर अब सवाल उठने लगे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और उग्र प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
