फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का ऐतिहासिक संदेश: वेल डी’हिव़ त्रासदी की याद में संकल्प और सच्चाई का संकल्प

आज वेल डी’हिव़ (Vel d’Hiv) त्रासदी की बरसी पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक मार्मिक और ऐतिहासिक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने अतीत की भयावहता को याद करते हुए यह संकल्प भी दोहराया कि यहूदी विरोध (एंटीसेमिटिज़्म) के ज़हर से फ्रांस हर हाल में लड़ेगा।
🇫🇷 इतिहास से सीख, सच्चाई से नज़र मिलाने का साहस
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संदेश में पूर्व राष्ट्रपति जैक्स शिराक की 16 जुलाई 1995 को दी गई उस ऐतिहासिक स्वीकारोक्ति को भी याद किया, जिसमें उन्होंने माना था कि 1942 में फ्रांसीसी पुलिस द्वारा 13,000 से अधिक यहूदियों की गिरफ़्तारी में स्वयं फ्रांस की भी जिम्मेदारी थी।
मैक्रों ने लिखा:
“16 जुलाई 1995 को राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने कहा था कि फ्रांस ने अपूरणीय अपराध किया। यह उस चुप्पी का अंत था जो दशकों तक हमारे इतिहास पर छाई रही।”
यह बयान उस ऐतिहासिक मोड़ का प्रतीक बना, जब एक राष्ट्र ने अपनी त्रुटियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया।
🕯️ स्मृति और ज़िम्मेदारी का संदेश
मैक्रों ने कहा कि वेल डी’हिव़ की त्रासदी केवल यहूदी समाज की नहीं, बल्कि पूरे मानवता की पीड़ा है। उन्होंने लिखा:
“इस स्मृति दिवस पर हम अपने उत्तरदायित्व, सच्चाई और साहस के प्रति निष्ठा जताते हैं।”
यह संदेश स्पष्ट करता है कि स्मृति केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि उससे सबक लेकर वर्तमान और भविष्य को अधिक न्यायपूर्ण बनाना भी है।
✡️ शोहा पीड़ितों को श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति मैक्रों ने होलोकॉस्ट (Shoah) के दौरान मारे गए यहूदियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा:
“हम deportation के शिकार सभी शोहा पीड़ितों की स्मृति को अपने हृदय में संजोए हुए हैं।”
उनका यह वक्तव्य न केवल पीड़ितों की आत्मा को नमन करता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि मानवाधिकारों की रक्षा के लिए स्मरणशीलता आवश्यक है।
🚫 एंटीसेमिटिज़्म के ख़िलाफ़ कठोर रुख
अपने संदेश के अंत में मैक्रों ने साफ़ शब्दों में कहा:
“हम यहूदी विरोध की ज़हरभरी सोच से हमेशा संघर्ष करते रहेंगे।”
यह बयान केवल प्रतीकात्मक नहीं था, बल्कि यह मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ रही यहूदी विरोधी घटनाओं के विरुद्ध एक वैश्विक नैतिक प्रतिबद्धता की पुकार है।
📰 निष्कर्ष:
इमैनुएल मैक्रों का यह संदेश न केवल एक संवेदनशील स्मृति का प्रतीक है, बल्कि यह सच्चाई, न्याय और लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति फ्रांस की अडिग निष्ठा का भी प्रमाण है। यह भाषण बताता है कि जब कोई राष्ट्र अपने अतीत की गलतियों को स्वीकार करता है और उनसे सीखता है, तभी वह भविष्य को बेहतर दिशा दे सकता है।
