फ़रवरी 14, 2026

युवा बहिष्करण और डिजिटल कौशल खाई पर ILO ने जताई गहरी चिंता

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नई दिल्ली, 20 जुलाई 2025:
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें वैश्विक स्तर पर युवाओं के बढ़ते बहिष्करण और डिजिटल कौशल में गहराते अंतर को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लाखों युवा न केवल रोजगार से वंचित हैं, बल्कि तकनीकी दक्षता की कमी के चलते भविष्य की नौकरियों से भी कटते जा रहे हैं।

🌍 डिजिटल युग में बढ़ता असमानता का संकट

ILO की रिपोर्ट में बताया गया है कि तकनीकी प्रगति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में प्रवेश के बावजूद, अधिकांश विकासशील देशों के युवा डिजिटल उपकरणों और शिक्षा संसाधनों तक पहुँच नहीं पा रहे हैं। यह स्थिति उन्हें न केवल वर्तमान बल्कि आने वाले दशकों की अर्थव्यवस्था से भी बाहर कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • विश्व के 68% युवा ऐसे देशों में रहते हैं जहाँ उन्हें डिजिटल कौशल सीखने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते।
  • विशेषकर महिलाएं, ग्रामीण युवा और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के युवा इस खाई का सबसे बड़ा शिकार हैं।
  • दक्षिण एशिया और अफ्रीका इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र माने जा रहे हैं।

📉 शिक्षा और प्रशिक्षण में भारी कमी

ILO ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें और वैश्विक संगठन तत्काल कदम नहीं उठाते, तो युवा बेरोजगारी की दर और भी विकराल रूप धारण कर सकती है।
आज भी बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक शिक्षा पद्धतियों में फंसे हुए हैं, जो आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रही हैं।

🧠 डिजिटल कौशल: अब विलासिता नहीं, आवश्यकता है

ILO ने यह स्पष्ट किया है कि डिजिटल साक्षरता अब केवल एक अतिरिक्त योग्यता नहीं रही, बल्कि यह नौकरी पाने और समाज में सक्रिय रूप से भागीदारी के लिए अनिवार्य है।
हालांकि कुछ देशों ने डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम, कोडिंग बूटकैम्प और ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म के ज़रिए पहल शुरू की है, लेकिन यह प्रयास अभी भी सीमित और असमान रूप से फैले हुए हैं।

🔍 क्या करने की जरूरत है?

ILO ने सरकारों, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों से निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की है:

  1. डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार: ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और उपकरणों की पहुंच सुनिश्चित करना।
  2. व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश: युवाओं को तकनीकी और डिजिटल क्षेत्रों में कौशल प्रदान करना।
  3. समान अवसर सुनिश्चित करना: लैंगिक, सामाजिक और आर्थिक आधार पर भेदभाव को समाप्त कर, सबको बराबरी का मंच देना।
  4. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देना: निजी कंपनियों के साथ मिलकर ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के मौके बढ़ाना।

🔚 निष्कर्ष

ILO की यह चेतावनी सिर्फ एक आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के युवाओं के भविष्य को लेकर एक गंभीर संकेत है। यदि डिजिटल खाई को आज नहीं भरा गया, तो कल यह आर्थिक और सामाजिक संकट में बदल सकती है।
समय आ गया है कि नीतिगत फैसलों और ठोस कार्रवाई के ज़रिए हम युवाओं को सशक्त बनाएं और एक समावेशी डिजिटल भविष्य की नींव रखें।


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