OIC ने फिलिस्तीनी गिरजाघरों पर हमलों की निंदा की, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए वैश्विक कार्रवाई की मांग की

जेद्दा/रामल्ला, 20 जुलाई 2025: इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने फिलिस्तीन में ईसाई धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक गहरी चिंता का विषय बताया है। OIC ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाए।
⛪ गिरजाघरों को बनाया जा रहा है निशाना
हाल के महीनों में गाजा, यरुशलम और वेस्ट बैंक में कई ऐतिहासिक और पवित्र ईसाई स्थलों पर हमले हुए हैं। इनमें कुछ चर्चों को क्षतिग्रस्त किया गया, जबकि कुछ जगहों पर धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया गया। OIC ने इन घटनाओं को न केवल धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया, बल्कि इसे एक “सांप्रदायिक तनाव को भड़काने वाला खतरनाक प्रयास” भी कहा।
🌍 वैश्विक हस्तक्षेप की मांग
OIC के महासचिव हुसैन इब्राहिम ताहा ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “धार्मिक स्थलों पर हमले किसी एक धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ अपराध हैं। अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को अनिवार्य बनाते हैं।”
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, यूनेस्को, और अन्य वैश्विक संस्थाओं को इस मामले में निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। “यह समय है कि हम धार्मिक स्थलों को सिर्फ धरोहर नहीं, बल्कि मानवता की साझी विरासत के रूप में देखें और उसकी रक्षा करें,” ताहा ने कहा।
🇵🇸 फिलिस्तीनी ईसाई समुदाय की चिंता
फिलिस्तीन में ईसाई अल्पसंख्यक पहले से ही एक कठिन सामाजिक-राजनीतिक माहौल में रह रहे हैं। गिरजाघरों पर हमलों से उनमें भय का वातावरण और गहरा गया है। कई धार्मिक नेताओं और नागरिक संगठनों ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की है।
यरुशलम के एक चर्च प्रमुख फादर यूसुफ खालिद ने कहा, “हम शांति और सौहार्द की कामना करते हैं, लेकिन हर बार हमारी प्रार्थनाएं बंदूकों और तोड़फोड़ से कुचली जाती हैं। क्या हमारी आस्था की कोई कीमत नहीं?”
🕊️ धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता
OIC ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म सभी ने धार्मिक स्थलों की पवित्रता को सर्वोच्च सम्मान देने की शिक्षा दी है। धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता की रक्षा न केवल धार्मिक कारणों से, बल्कि सामाजिक स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए भी आवश्यक है।
🔚 निष्कर्ष
OIC की इस पहल ने फिलिस्तीन में धार्मिक स्थलों की रक्षा के मुद्दे को एक बार फिर वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना शेष है कि क्या विश्व समुदाय, विशेषकर पश्चिमी राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय संगठन, इस संवेदनशील मसले पर कार्रवाई करने को तैयार हैं या नहीं। एक ओर जहां युद्ध और संघर्ष की छाया गहरी होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्थलों की रक्षा मानवता की अग्नि परीक्षा बन चुकी है।
