फ़रवरी 13, 2026

ISRO का ऐतिहासिक कदम: GSLV-F16 और NISAR मिशन के प्रक्षेपण की घड़ी आई पास

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📅 30 जुलाई, 2025 | 📍 श्रीहरिकोटा, भारत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाया है। आज के दिन GSLV-F16 रॉकेट के माध्यम से NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) उपग्रह को प्रक्षेपित किया जा रहा है। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

ISRO द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, लॉन्च की लाइव कवरेज आज शाम 5:10 बजे (IST) से शुरू हो चुकी है और लिफ्टऑफ शाम 5:40 बजे (IST) निर्धारित किया गया है। रॉकेट लॉन्च की पूरी प्रक्रिया को ISRO के यूट्यूब चैनल पर लाइव देखा जा सकता है।

🚀 क्या है GSLV-F16?

GSLV-F16 यानी Geosynchronous Satellite Launch Vehicle का यह संस्करण एक शक्तिशाली और भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल है जो जियोसिंक्रोनस कक्षा में भारी उपग्रहों को स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें क्रायोजेनिक अपर स्टेज (Cryogenic Upper Stage) का उपयोग किया गया है, जो इसे अधिक पेलोड वहन क्षमता प्रदान करता है।

🛰️ NISAR मिशन की खासियत

NISAR (निसार) एक संयुक्त भारत-अमेरिका उपग्रह मिशन है जिसे पृथ्वी की सतह की सटीक निगरानी के लिए तैयार किया गया है। यह सैटेलाइट दो प्रकार की रडार तकनीकों – L-बैंड (NASA) और S-बैंड (ISRO) – से लैस है। इसका मुख्य उद्देश्य:

  • भूकंप, हिमनदों की गति, समुद्र-स्तर में वृद्धि और वनों में हो रहे बदलावों की निगरानी करना
  • प्राकृतिक आपदाओं की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सशक्त बनाना
  • जलवायु परिवर्तन से संबंधित डेटा एकत्र करना

यह मिशन दुनिया का पहला ड्यूल-बैंड रडार इमेजिंग सैटेलाइट मिशन है जो वैश्विक सतह परिवर्तनों की मिलीमीटर-स्तरीय सटीकता के साथ निगरानी करेगा।

🌍 भारत-अमेरिका सहयोग का प्रतीक

NISAR न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह भारत और अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक और तकनीकी सहयोग का भी परिचायक है। NASA और ISRO दोनों ही इस मिशन में बराबरी की साझेदारी निभा रहे हैं, जो भविष्य में संयुक्त वैज्ञानिक अभियानों की संभावनाओं को और मज़बूत करता है।

🔖 निष्कर्ष:

आज का दिन भारत के अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने जा रहा है। GSLV-F16 के साथ NISAR का सफल प्रक्षेपण न केवल ISRO की तकनीकी क्षमता को सिद्ध करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को और ऊँचाई प्रदान करता है।


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