दिल्ली के वकीलों की हड़ताल : उपराज्यपाल की अधिसूचना पर विरोध तेज

नई दिल्ली, 22 अगस्त 2025 – दिल्ली की जिला अदालतों से जुड़े वकीलों ने उपराज्यपाल (LG) द्वारा जारी हालिया अधिसूचना के खिलाफ दो दिन की हड़ताल की घोषणा की है। यह अधिसूचना पुलिस गवाही (depositions) को अदालत के बजाय थानों से रिकॉर्ड करने की अनुमति देती है, जिस पर वकीलों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
अदालतों में कामकाज ठप
हड़ताल के कारण शुक्रवार को कई मामलों की सुनवाई स्थगित कर दी गई। दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले की बहस भी अब 27 अगस्त तक टाल दी गई है। सभी जिला अदालतों में 22 और 23 अगस्त को काम पूरी तरह ठप रहा।
वकीलों की आपत्ति
वकीलों की शीर्ष समिति “कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन्स” ने गुरुवार को आपात बैठक बुलाकर इस अधिसूचना को “मनमाना, गैरकानूनी और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध” बताया। उनका कहना है कि यदि पुलिस थानों से ही गवाही रिकॉर्ड की जाने लगी, तो न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे।
पहले भी जताई थी नाराज़गी
20 अगस्त को वकीलों की समिति ने उपराज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री, कानून मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री और दिल्ली के गृह मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अधिसूचना का विरोध किया था। समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो मजबूरन वकील हड़ताल करेंगे। बावजूद इसके अधिसूचना वापिस नहीं ली गई, जिससे वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार कर दिया।
वकीलों का बयान
नई दिल्ली बार एसोसिएशन (NDBA) के सचिव तरुण राणा ने कहा –
“यह आदेश केवल वकीलों के खिलाफ ही नहीं बल्कि न्याय और जनहित के भी विरुद्ध है। यदि गवाहियों को पुलिस थानों में रिकॉर्ड किया जाएगा, तो इससे मुकदमों की निष्पक्षता प्रभावित होगी और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर असर पड़ेगा।”
आगे की रणनीति
कोऑर्डिनेशन कमेटी ने ऐलान किया है कि 23 अगस्त के बाद दोबारा बैठक कर स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा और आगे की कार्यवाही पर निर्णय लिया जाएगा।
👉 कुल मिलाकर, दिल्ली के वकील इस अधिसूचना को न्यायिक प्रक्रिया पर सीधा हमला मानते हुए विरोध की राह पर हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और उपराज्यपाल इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
