फ़रवरी 12, 2026

भारत में एआई का विकास : नई दिशा की ओर बढ़ता राष्ट्र

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नई दिल्ली, 26 अगस्त 2025
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज दुनिया भर में तेजी से प्रगति कर रही है और भारत भी इस तकनीकी क्रांति में पीछे नहीं है। एआई का विकास केवल वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब हमारे दैनिक जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग तक पहुँच चुका है।

एआई का शुरुआती दौर

भारत में एआई अनुसंधान की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी, लेकिन उस समय संसाधनों और तकनीकी ढांचे की कमी के कारण इसकी गति बहुत धीमी रही। इंटरनेट, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग के विकास के बाद 2010 के बाद से एआई ने भारत में रफ्तार पकड़ी।

शिक्षा और अनुसंधान में एआई

देश के प्रमुख संस्थान जैसे आईआईटी, आईआईएससी और कई निजी विश्वविद्यालय एआई पर विशेष शोध कर रहे हैं। सरकार ने “राष्ट्रीय एआई रणनीति” (National AI Strategy) बनाई है, जिसका उद्देश्य युवाओं को एआई में प्रशिक्षित करना और देश को वैश्विक स्तर पर तकनीकी केंद्र बनाना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान

भारत में एआई का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं में देखा जा रहा है। एआई आधारित मशीनें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान करने में मदद कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और एआई चैटबॉट्स के जरिए मरीजों को प्राथमिक सलाह दी जा रही है।

कृषि में एआई

भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा स्थान है। एआई आधारित ड्रोन और सेंसर किसानों को मौसम पूर्वानुमान, फसल रोग की पहचान और सिंचाई प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। इससे उत्पादन बढ़ रहा है और लागत घट रही है।

उद्योग और रोजगार

मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स और बैंकिंग क्षेत्र एआई से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। चैटबॉट्स, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन और मशीन विज़न से कार्यक्षमता बढ़ रही है। हालांकि, इससे रोजगार के स्वरूप में बदलाव हो रहा है, जिसके लिए नए कौशल की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ और भविष्य

भारत में एआई के विकास के सामने कुछ बड़ी चुनौतियाँ हैं –

  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता
  • ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी पहुंच की कमी
  • नौकरी छिनने का डर

फिर भी, यदि शिक्षा, रिसर्च और नीति निर्माण पर सही ध्यान दिया जाए तो भारत आने वाले वर्षों में एआई क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है।


निष्कर्ष

भारत में एआई का विकास केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी माध्यम है। आने वाले दशक में एआई भारत को “डिजिटल महाशक्ति” बनाने की दिशा में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।


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