नेपाल की राजनीति में उथल-पुथल: प्रधानमंत्री ओली सहित कई मंत्रियों ने दिया इस्तीफ़ा

काठमांडू में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने नेपाल की राजनीति को हिला कर रख दिया है। लगातार बढ़ते विरोध और हिंसक घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है।
राजनीतिक संकट गहराया
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा राजधानी समेत कई हिस्सों में भड़क उठा। उच्च-स्तरीय नेताओं और उनके सहयोगियों के घरों पर हमला और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। विरोध का दायरा इतना बढ़ा कि यह लहर पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के करीबी लोगों और विभिन्न दलों के दफ़्तरों तक पहुँच गई।
प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और मंत्रियों का त्यागपत्र
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और बल प्रयोग किया। इसी कठोर कार्रवाई से असहमति जताते हुए जल आपूर्ति मंत्री प्रदीप यादव ने तुरंत अपना इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बाद कृषि एवं पशुपालन मंत्री राम नाथ अधिकारी और गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी इस्तीफ़ा सौंपते हुए सरकार से दूरी बना ली।
जनजीवन पर असर
अशांति और सुरक्षा कारणों से काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें स्थगित कर दी गईं। इससे यात्रियों और व्यापार पर बड़ा असर पड़ा है।
आगे की राह अनिश्चित
प्रधानमंत्री ओली और मंत्रियों के इस्तीफ़ों के बाद नेपाल में सत्ता का भविष्य अनिश्चित हो गया है। राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते जनाक्रोश के बीच अब यह देखना होगा कि नए नेतृत्व के तहत देश किस दिशा में आगे बढ़ता है।
