शिक्षा सामग्री पर शून्य जीएसटी: छात्रों के लिए बड़ी राहत

भारत सरकार ने हाल ही में शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत दी है। नए #NextGenGST सुधारों के अंतर्गत अब शैक्षणिक आवश्यकताओं की कई वस्तुएँ शून्य (ZERO) जीएसटी के दायरे में आ गई हैं। इसका अर्थ यह है कि अब इन वस्तुओं पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लगेगा, जिससे शिक्षा से जुड़ी सामग्री पहले की तुलना में और अधिक किफ़ायती हो जाएगी।
किन वस्तुओं पर लागू होगा शून्य जीएसटी?
नई व्यवस्था के अनुसार अब निम्नलिखित आवश्यक शैक्षणिक सामग्री पर जीएसटी नहीं लिया जाएगा:
- मानचित्र (Maps)
- ग्लोब (Globes)
- पेंसिल (Pencils)
- क्रेयॉन (Crayons)
- शार्पनर (Sharpeners)
- रबर/इरेज़र (Erasers)
- कॉपियाँ और नोटबुक्स (Notebooks)
छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा लाभ
शिक्षा का खर्च़ आमतौर पर हर परिवार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। कॉपियों, पेंसिलों और अन्य सामग्रियों पर टैक्स हटने से लाखों परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा। ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के बच्चों के लिए यह निर्णय और भी अहम है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी पढ़ाई की मूलभूत सामग्री कम दाम में मिल सकेगी।
शिक्षा में समान अवसर की दिशा में कदम
यह सुधार केवल टैक्स छूट भर नहीं है, बल्कि यह “सबके लिए शिक्षा” (Education for All) के लक्ष्य की ओर बढ़ाया गया एक ठोस कदम है। सरकार का यह निर्णय शिक्षा को अधिक समावेशी और किफ़ायती बनाने के प्रयासों को मजबूत करता है। जब बच्चों को उनकी मूलभूत अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध होगी, तब उनकी पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और ड्रॉपआउट दर भी कम होगी।
निष्कर्ष
शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाना किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। शैक्षणिक सामग्रियों पर जीएसटी हटाना केवल एक आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल छात्रों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और भी मजबूत करेगी।
