स्कारबोरो रीफ विवाद: चीन की चाल और अमेरिका-फिलीपींस की साझेदारी

दक्षिण चीन सागर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। यहां स्थित स्कारबोरो रीफ (Scarborough Reef), जिसे फिलीपींस पनाटाग शोल (Panatag Shoal) के नाम से जानता है, एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो ने एक ट्वीट के ज़रिए इस मुद्दे पर चीन की नीतियों की आलोचना करते हुए फिलीपींस के साथ अमेरिका की एकजुटता जताई है। आइए इस विवाद को विस्तार से समझें।
स्कारबोरो रीफ: सामरिक और आर्थिक महत्व
स्कारबोरो रीफ फिलीपींस के लुज़ोन द्वीप से लगभग 124 समुद्री मील पश्चिम में स्थित है। इस पर चीन, फिलीपींस और ताइवान तीनों अपना दावा करते हैं। यह क्षेत्र मछली पकड़ने और समुद्री जैव विविधता के लिहाज़ से बेहद समृद्ध है, इसलिए आर्थिक दृष्टि से भी इसका खास महत्व है। साथ ही, यह दक्षिण चीन सागर के सामरिक गलियारे में आता है, जिससे इसका सैन्य और व्यापारिक महत्व और बढ़ जाता है।
चीन की “प्रकृति रिज़र्व” योजना: विस्तारवाद की नई परत
चीन ने हाल ही में इस रीफ को “राष्ट्रीय प्रकृति रिज़र्व” घोषित करने की योजना का संकेत दिया है। सतह पर यह कदम पर्यावरण संरक्षण का प्रयास लगता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह असल में चीन की संप्रभुता को स्थापित करने की रणनीति है। समस्या यह है कि यह इलाका फिलीपींस के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में आता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत मान्यता प्राप्त है। इसीलिए फिलीपींस इस कदम को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मानता है।
अमेरिका का रुख और रक्षा संधि
अमेरिका और फिलीपींस के बीच 1951 से म्यूचुअल डिफेंस ट्रीटी (Mutual Defense Treaty) लागू है। इसके तहत अमेरिका फिलीपींस की सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा करता है। मार्को रुबियो का हालिया बयान इसी पृष्ठभूमि को मजबूत करता है। अमेरिका का मानना है कि चीन की यह नीति न केवल फिलीपींस की संप्रभुता को चुनौती देती है, बल्कि पूरे क्षेत्रीय संतुलन को अस्थिर कर सकती है।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
अगर चीन अपने इरादों में सफल होता है, तो इसका असर सिर्फ फिलीपींस तक सीमित नहीं रहेगा। वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई जैसे अन्य दावेदार देशों पर भी दबाव बढ़ेगा। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दा मानते हैं। यह विवाद सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता के सिद्धांतों की भी परीक्षा है।
निष्कर्ष
स्कारबोरो रीफ आज एक ऐसे टकराव का प्रतीक है, जहां चीन की आक्रामक नीतियों और फिलीपींस की संप्रभुता के बीच संघर्ष साफ झलकता है। अमेरिका का सक्रिय समर्थन इस विवाद को और भी गंभीर बना देता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह विवाद शांतिपूर्ण वार्ता से सुलझेगा या फिर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव को और गहरा करेगा।
