फ़रवरी 13, 2026

यरुशलम की ओर अमेरिकी प्रतिनिधि: हमास और शांति पर बड़ा बयान

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यरुशलम की यात्रा पर रवाना होते हुए अमेरिका के सचिव मार्को रुबियो ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य ध्यान बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने, नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुँचाने और हमास से उत्पन्न ख़तरे का समाधान खोजने पर होगा।

रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करनी है, तो हमास का अस्तित्व जारी नहीं रह सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच लगातार तनाव और हिंसा बढ़ रही है और निर्दोष नागरिक सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।

बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता पर ज़ोर

मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका का सबसे पहला उद्देश्य बंधकों की सुरक्षित रिहाई है। संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग बंधक बनाए गए हैं, और उनके परिवार निरंतर भय और चिंता में जी रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध की स्थिति में सबसे अधिक प्रभावित आम नागरिक होते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि मानवीय सहायता — जैसे भोजन, दवाइयाँ और सुरक्षित आश्रय — समय पर और बिना किसी बाधा के नागरिकों तक पहुँचे।

हमास को लेकर सख्त रुख

रुबियो का बयान यह भी दर्शाता है कि अमेरिका हमास को क्षेत्रीय शांति की सबसे बड़ी बाधा मानता है। उन्होंने कहा कि जब तक हमास सक्रिय है, तब तक स्थायी शांति का सपना अधूरा रहेगा। उनके अनुसार, अगर क्षेत्र में स्थिरता और शांति लानी है, तो आतंकी गतिविधियों और हिंसक संगठनों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।

क्षेत्रीय शांति की चुनौतियाँ

मध्य पूर्व लंबे समय से संघर्ष, अविश्वास और हिंसा का केंद्र रहा है। इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद में कई बार युद्धविराम और शांति वार्ताएँ हुईं, लेकिन उनका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब अमेरिकी नेतृत्व का यह नया हस्तक्षेप इस ओर संकेत करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्रीय शांति को लेकर दबाव बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

मार्को रुबियो की यह यात्रा और बयान आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। उनका यह संदेश साफ है कि यदि क्षेत्र में स्थायी शांति चाहिए तो बंधकों की वापसी, नागरिकों तक सहायता की पहुँच और हमास जैसी ताक़तों का अंत ज़रूरी है। अब देखना यह होगा कि क्या यह पहल मध्य पूर्व को हिंसा से निकालकर शांति की ओर बढ़ा पाएगी या फिर यह भी केवल एक और प्रयास बनकर रह जाएगी।

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