फ़रवरी 15, 2026

नीबी गांव, चित्रकूट: बिजली और पेयजल संकट ने मानवाधिकारों पर खड़ा किया सवाल

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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद का नीबी गांव आज विकास की दौड़ में पीछे छूटता नज़र आता है। यहां के ग्रामीण लंबे समय से बिजली और पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। यह स्थिति न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि यह बुनियादी मानवाधिकारों के हनन का भी गंभीर मामला बन चुकी है।

बिजली संकट: अंधेरे में गांव की ज़िंदगी

नीबी  गांव में बिजली आपूर्ति बेहद अनियमित है। घंटों तक कटौती, जर्जर तार और बार-बार होने वाली फाल्ट से ग्रामीणों की दिनचर्या बाधित रहती है। किसानों की सिंचाई प्रभावित होती है, बच्चों की पढ़ाई अंधेरे में ठप हो जाती है और छोटे व्यवसाय ठहर जाते हैं। इस बिजली संकट ने ग्रामीणों को आधुनिक सुविधाओं और अवसरों से वंचित कर दिया है।

पेयजल संकट: जीवन का मूल अधिकार खतरे में

बिजली संकट के साथ-साथ यहां के लोग पेयजल की गंभीर समस्या से भी त्रस्त हैं।  ट्यूबवेल पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे, वहीं बिजली न होने से मोटर पंप भी बेकार हो जाते हैं। नतीजा यह है कि महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ता है। साफ पानी की अनुपलब्धता से स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ गए हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का जोखिम भी ग्रामीणों पर मंडरा रहा है।

मानवाधिकारों का हनन

बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नागरिकों का संवैधानिक और मानवाधिकार दोनों हैं। जब कोई समुदाय लगातार इनसे वंचित होता है, तो यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है। निबी गांव की स्थिति यही दर्शाती है—जहां विकास की योजनाएं कागज़ों तक सीमित हैं और ज़मीनी हकीकत में लोग अपने अधिकारों से वंचित।

सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

ग्रामीणों की नाराज़गी इस बात से है कि अनेक बार शिकायतों और मांगों के बावजूद ठोस समाधान नहीं निकाला गया। सरकार और प्रशासन की यह लापरवाही केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों के प्रति उदासीनता भी है।

समाधान की राह

गांव में 24 घंटे स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना।

वैकल्पिक ऊर्जा जैसे सोलर प्लांट की स्थापना।

शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक जल योजनाएं।

प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शी निगरानी और त्वरित कार्यवाही।


👉 निष्कर्ष:
चित्रकूट का नीबी गांव आज जिस संकट से गुजर रहा है, वह केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की जमीनी हकीकत है। बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना सीधा मानवाधिकार का हनन है। अब समय है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालें, ताकि निबी गांव और इसके लोग भी विकास की रोशनी और जीवन की बुनियादी सुविधाओं का आनंद उठा सकें।


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