फ़रवरी 12, 2026

अमेरिका की नई विदेश सहायता रणनीति: ‘अमेरिका फर्स्ट’ मॉडल में एनजीओ की भूमिका हाशिये पर

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ट्रंप प्रशासन ने विदेशी सहायता नीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव करते हुए एक ऐसी प्रणाली लागू की है जिसमें पारंपरिक एनजीओ संरचना की जगह सीधे देशों के साथ साझेदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। यह नया ढांचा अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखते हुए सहायता प्रवाह को अधिक “नियंत्रित, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख” बताता है।


🇺🇸 नई नीति के प्रमुख आयाम

1. एनजीओ तंत्र पर कड़ा रुख

प्रशासन ने उन अंतरराष्ट्रीय एनजीओ की आलोचना की है जो वर्षों से अमेरिकी विदेशी सहायता कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं। उनका तर्क है कि यह संस्थाएँ बड़े-बड़े वेतन, यात्रा खर्च और प्रबंधन लागत में मदद का बड़ा हिस्सा खर्च कर देती हैं। नई व्यवस्था इन्हें हटाकर संसाधनों को सीधे लाभार्थी देशों तक पहुँचाने का दावा करती है।

2. द्विपक्षीय सहयोग पर केंद्रित मॉडल

अब अमेरिका सहायता प्रदान करने से पहले संबंधित सरकार के साथ सीधा करार करेगा। इसका पहला उदाहरण केन्या को दी गई $2.5 बिलियन की स्वास्थ्य सहायता है, जिसे वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने औपचारिक रूप दिया।

3. USAID की भूमिका में कमी

दशकों से अमेरिकी विदेश सहायता का मुख्य संचालन USAID करती रही है, लेकिन नई नीति में एजेंसी की भूमिका सीमित कर दी गई है। इसके स्थान पर स्थानीय सरकारों, निजी कंपनियों और क्षेत्रीय साझेदारों को अधिक महत्व दिया जा रहा है।


🌍 लाभ, चिंता और आलोचना

1. हैती में केन्या की सहभागिता की प्रशंसा

अमेरिका ने हैती में सुरक्षा बल भेजने के लिए केन्या की खुलकर तारीफ की है। यह कदम ट्रंप प्रशासन की इस सोच से मेल खाता है कि सहयोगी देश वैश्विक चुनौतियों का बोझ साझा करें और अमेरिका अकेले जिम्मेदारी न उठाए।

2. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की आशंका

कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एनजीओ नेटवर्क को हटाने से कई देशों की कमजोर स्वास्थ्य प्रणालियाँ प्रभावित हो सकती हैं। एनजीओ न केवल संसाधन बल्कि तकनीकी दक्षता, प्रशिक्षण और जमीनी ढाँचों का भी बड़ा हिस्सा संभालते रहे हैं। उनके हटने से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावटें आ सकती हैं।

3. राजनीतिक व कूटनीतिक जोखिम

बहुपक्षीय सहयोग से दूरी बनाने का निर्णय अमेरिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को चुनौती दे सकता है। यूरोपीय साझेदारों और अमेरिकी कांग्रेस के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने आशंका जताई है कि यह एकतरफा नीति लंबे समय में राजनयिक संबंधों को कमजोर कर सकती है।


✍️ समापन विचार

‘अमेरिका फर्स्ट’ आधारित यह नई विदेश सहायता नीति एक साहसिक कदम जरूर है, लेकिन इसके प्रभावों पर गहरी बहस भी जारी है। जहाँ यह नीति अमेरिकी हितों की रक्षा और फंड के सीधापन पर जोर देती है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहयोग की पारंपरिक प्रणाली को भी चुनौती देती है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह मॉडल क्या वास्तव में सहायता को अधिक प्रभावी बनाता है या अमेरिकी वैश्विक नेतृत्व की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े करता है।


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