फ़रवरी 12, 2026

ईरान के सर्वोच्च नेता का संदेश: हिजाब पहनने वाली महिलाएँ भी आधुनिकता और प्रगति की धुरी

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देते हुए उन पश्चिमी दृष्टिकोणों को चुनौती दी है जिनमें हिजाब को पिछड़ेपन या आधुनिकता में रुकावट के रूप में देखा जाता है। उनका कहना है कि हिजाब न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा और आत्मसम्मान को भी दर्शाता है।


हिजाब: सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक

खामेनेई के अनुसार, हिजाब महिलाओं की अस्मिता को सशक्त बनाता है। उन्होंने पश्चिमी समाजों की इस सोच की आलोचना की कि महिला की आज़ादी का अर्थ उसके पहनावे की खुली अभिव्यक्ति से है। खामेनेई का कहना है कि ईरान में हिजाब को सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, और यह महिलाओं को समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।


पश्चिमी आलोचनाओं पर प्रश्नचिह्न

सर्वोच्च नेता ने यह भी रेखांकित किया कि हिजाब को प्रगति में बाधा मानने का पश्चिमी तर्क वास्तविकता से बहुत दूर है। उन्होंने बताया कि ईरानी महिलाएँ:

  • उच्च शिक्षा में उल्लेखनीय संख्या में आगे हैं,
  • वैज्ञानिक एवं तकनीकी शोध में सक्रिय योगदान दे रही हैं,
  • प्रशासनिक पदों और सामाजिक क्षेत्रों में नेतृत्व निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि किसी समाज की प्रगति का आकलन महिलाओं के परिधान से नहीं, बल्कि उनके ज्ञान, नैतिक मूल्यों और समाज में उनके योगदान से होना चाहिए।


ईरान में चल रही बहस और राजनीतिक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में अनिवार्य हिजाब कानून को लेकर व्यापक चर्चा और विरोध जारी है। समाज का एक वर्ग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मुद्दा मानता है, जबकि परंपरागत समूह इसे धार्मिक पहचान की रक्षा से जोड़कर देखता है। ऐसे माहौल में खामेनेई की टिप्पणी सरकार की स्थिति को स्पष्ट करती है कि हिजाब प्रतिबंध नहीं, बल्कि सम्मान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।


निष्कर्ष: आधुनिकता और धार्मिक पहचान साथ-साथ

खामेनेई का यह बयान वैश्विक मंच पर यह संदेश देता है कि धार्मिक आस्था और आधुनिक सोच एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। हिजाब पहनने वाली महिलाएँ:

  • शिक्षा,
  • विज्ञान,
  • सामाजिक सेवा,
  • और राजनीति

सभी क्षेत्रों में प्रभावशाली भूमिका निभा सकती हैं। यह दृष्टिकोण उस परंपरागत पश्चिमी धारणा को चुनौती देता है, जो महिलाओं की स्वतंत्रता को केवल उनके बाहरी रूप-रंग से जोड़कर देखती है।


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