दिल्ली पुलिस ने चीनी लिंक से जुड़े हाई-टेक साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश

क्रिप्टोकरेंसी और फर्जी कंपनियों के ज़रिये करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद जटिल अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी कंपनियों, बनावटी बैंक खातों और क्रिप्टो लेन–देन की मदद से बड़े पैमाने पर आर्थिक धोखाधड़ी कर रहा था। यह पूरा नेटवर्क चीन में बैठे संचालकों द्वारा दूर से नियंत्रित किया जाता था, जबकि जमीन पर भारतीय एजेंट इसे अंजाम दे रहे थे।
61 वर्षीय व्यक्ति की शिकायत से खुला पूरा मामला
जांच की शुरुआत तब हुई जब एक 61 वर्षीय नागरिक ने पुलिस को बताया कि ऑनलाइन फ्रॉड के जरिए उनसे ₹33.1 लाख ठग लिए गए। पुलिस ने जब लेन–देन की डिटेल खंगाली तो पाया कि ₹10.38 लाख की राशि एक कंपनी Belcrest India Pvt. Ltd. के खाते में भेजी गई थी, जो बाद में एक शेल कंपनी निकली।
शेल कंपनी के संचालक सामने आए
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि इस फर्जी कंपनी को शिवम सिंह और लक्षय नाम के आरोपी संचालित कर रहे थे।
19 नवंबर 2025 को लक्षय की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं:
- उसने फर्जी कंपनी और कई बैंक खाते बनवाए
- बैंक किट और सिम कार्ड एक अन्य सदस्य शुभम को दिए
- इसके बदले उसे हर महीने ₹20,000 मिलते थे
दिल्ली–एनसीआर में छापेमारी, शुभम गिरफ्तार
लक्षय की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दिल्ली–एनसीआर में लगातार छापेमारी की। शुभम लगातार सिम कार्ड बदलकर गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अंततः 6 दिसंबर 2025 को तिलक नगर से पकड़ा गया।
उसके पास से बरामद हुआ:
- एक लैपटॉप
- दो मोबाइल फोन
- पाँच चेकबुक
- छह डेबिट कार्ड
क्रिप्टो के जरिये विदेशी हैंडलरों से जुड़ा नेटवर्क
पूछताछ के दौरान शुभम ने बताया कि वह विदेशी हैंडलर के निर्देश पर काम करता था। वह फर्जी कंपनियों के तीसरी–चौथी लेयर वाले बैंक खाते उपलब्ध कराता था, ताकि लेन–देन का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
- उसे भुगतान USDT नाम की क्रिप्टोकरेंसी में दिया जाता था
- वह इस क्रिप्टो को Kool Pay नाम की चीन-नियंत्रित फर्म को बेच देता था
मनी लॉन्ड्रिंग की बहुस्तरीय प्रक्रिया
पुलिस के अनुसार यह पूरा सिंडिकेट कई परतों में विभाजित था:
- Kool Pay पहले लेयर के बैंक खातों से पैसे निकालता था
- रकम को Belcrest जैसी शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया जाता
- कई बार खातों के बीच गोल-गोल घुमा कर स्रोत को छिपाया जाता
- फिर पैसा दोबारा क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी हैंडलरों को भेज दिया जाता
यह पूरा सिस्टम एक लगातार चलने वाली “फाइनेंशियल लेयरिंग मशीन” की तरह काम कर रहा था।
आरोपी की सबूत मिटाने की कोशिश नाकाम
लक्षय की गिरफ्तारी की खबर मिलने पर शुभम ने:
- Belcrest कंपनी की चेकबुक फाड़ डाली,
- और इस्तेमाल किया हुआ सिम कार्ड भी नष्ट कर दिया।
इसके बावजूद पुलिस ने वह मोबाइल फोन बरामद कर लिया जिसका उपयोग धोखाधड़ी में हुआ था।
जांच का दायरा होगा और बड़ा
पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। इस नेटवर्क में कई विदेशी कड़ियाँ हैं, जिन पर जांच जारी है। क्रिप्टो वॉलेट, बैंक खातों और डिजिटल लेन–देन की परतें खोलने पर और भी आरोपी सामने आने की उम्मीद है।
