फ़रवरी 14, 2026

मूर्तिकला के शिखर पुरुष राम वी. सुतार को विनम्र श्रद्धांजलि

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भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को लगी अपूरणीय क्षति

भारतीय कला परंपरा के इतिहास में एक युगांतकारी अध्याय शांत हो गया। 17 दिसंबर 2025 को विश्वविख्यात मूर्तिकार और भारत की प्रतिष्ठा के प्रतीक ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के रचनाकार राम वनजी सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जाना केवल एक कलाकार का जाना नहीं, बल्कि भारत की सृजनशील आत्मा को लगी गहरी चोट है।


साधना से शिखर तक: राम सुतार की जीवन यात्रा

19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के एक साधारण ग्रामीण परिवेश में जन्मे राम सुतार ने जीवन की शुरुआत अत्यंत सीमित संसाधनों के साथ की। किंतु उनकी दृष्टि, मेहनत और कला के प्रति निष्ठा ने उन्हें विश्व मंच पर स्थापित कर दिया।
उन्होंने पत्थर और धातु में केवल आकृतियाँ नहीं गढ़ीं, बल्कि इतिहास, विचार और राष्ट्रीय चेतना को मूर्त रूप दिया।

महात्मा गांधी की करुणा, नेहरू की दूरदृष्टि, डॉ. अंबेडकर की दृढ़ता और सरदार पटेल की लौह इच्छाशक्ति—इन सभी को उन्होंने अपनी कला के माध्यम से जीवंत किया।


स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: कला और राष्ट्रगौरव का अद्वितीय संगम

सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित 182 मीटर ऊँची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा ही नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी क्षमता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक भी है।
इस महाकृति ने राम सुतार को वैश्विक पहचान दिलाई और भारतीय मूर्तिकला को विश्व मानचित्र पर एक नई ऊँचाई प्रदान की।


सम्मान, पहचान और विरासत

अपनी असाधारण सेवाओं के लिए राम सुतार को भारत सरकार ने पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया। उनके बनाए शिल्प आज भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में सार्वजनिक स्थलों, संसद भवनों और संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रहे हैं।


अंतिम समय और राष्ट्रीय शोक

वे लंबे समय से आयुजनित समस्याओं से जूझ रहे थे और नोएडा स्थित अपने निवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पुत्र अनिल सुतार के अनुसार, उनका निधन शांतिपूर्ण रहा।
इस समाचार से कला जगत, इतिहास प्रेमियों और देशवासियों में शोक की लहर दौड़ गई।


श्रद्धांजलि संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं, कलाकारों और बुद्धिजीवियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि राम सुतार का जाना भारतीय कला परंपरा के लिए ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई असंभव है।


निष्कर्ष: अमर रहेगा उनका सृजन

राम वी. सुतार का जीवन यह सिखाता है कि साधारण परिस्थितियों में जन्म लेकर भी असाधारण योगदान दिया जा सकता है।
वे भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी गढ़ी हुई प्रतिमाएँ आने वाली पीढ़ियों को भारत के इतिहास, मूल्यों और सांस्कृतिक गौरव से जोड़ती रहेंगी।

एक युग समाप्त हुआ है, पर उनकी कला अनंत है।
ॐ शांति।


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