केच ज़िला दहशत की गिरफ्त में

बढ़ते अपहरण, डगमगाता व्यापार और प्रशासन पर उठते सवाल
पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत का केच ज़िला इन दिनों गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। हाल के हफ्तों में अपहरण की बढ़ती घटनाओं ने न केवल आम लोगों की नींद हराम कर दी है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी गहरा असर डाला है। स्थिति ऐसी बन गई है कि व्यापारी खुद को असहाय और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
🔎 अपहरण से उपजा भय का माहौल
केच ज़िले में प्रतिष्ठित कारोबारी परिवारों से जुड़े युवाओं के अपहरण ने इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और कानून-व्यवस्था कमजोर पड़ती दिख रही है। व्यापार से जुड़े लोग खुलेआम यह कहने लगे हैं कि अब कारोबार करना जोखिम भरा हो गया है।
🗣️ राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय राजनीति में भी उबाल है। नेशनल पार्टी के प्रमुख डॉ. अब्दुल मलिक बलोच ने तुर्बत में आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उनका कहना है कि सरकार को समय रहते चेताया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वहीं, ऑल पार्टीज़ केच के संयोजक नवाब खान शम्बिज़ई ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अपहृत लोगों को जल्द सुरक्षित वापस नहीं लाया गया, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। प्रस्तावित रैली और ज़िला-स्तरीय बंद की चेतावनी हालात की गंभीरता को दर्शाती है।
💼 व्यापार और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर
लगातार हो रही घटनाओं का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
- कई व्यापारियों ने निवेश रोक दिया है
- बाज़ारों में ग्राहक कम हो गए हैं
- कुछ दुकानदारों ने अस्थायी रूप से कारोबार बंद कर दिया है
इससे न केवल व्यापार, बल्कि रोज़गार भी प्रभावित हो रहा है। युवा वर्ग में निराशा और असंतोष तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।
🚨 प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों का आरोप है कि प्रांतीय सरकार हालात को लेकर उदासीन बनी हुई है। बार-बार शिकायतों और ज्ञापनों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में कोई प्रभावी सुधार नज़र नहीं आ रहा। इससे जनता का भरोसा प्रशासन से उठता जा रहा है।
🧩 निष्कर्ष
केच ज़िले में अपहरण की बढ़ती घटनाएं केवल अपराध की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले चुकी हैं। यदि इस पर तुरंत और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता, विकास और शांति पर पड़ सकता है। अब ज़रूरत है कि सरकार केवल बयान नहीं, बल्कि ज़मीन पर ठोस कदम उठाए।
