सुप्रीम कोर्ट का कठोर संदेश: आवारा पशुओं से मुक्त सड़कें ही सुरक्षित भारत की कुंजी

भारत में सड़क दुर्घटनाएँ अब केवल तेज़ रफ्तार या लापरवाह ड्राइविंग तक सीमित नहीं रहीं। हाल के वर्षों में एक नया और गंभीर कारण उभरकर सामने आया है—आवारा पशु। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए साफ कहा है कि जब तक सड़कें आवारा जानवरों से मुक्त नहीं होंगी, तब तक आम नागरिकों का जीवन सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
🐾 सड़क पर जानलेवा मौजूदगी: समस्या कितनी गंभीर?
देश के अनेक हिस्सों में गाय, बैल, कुत्ते और अन्य पशु सड़कों पर खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं।
- तेज़ रफ्तार वाहनों के सामने अचानक पशुओं के आ जाने से गंभीर दुर्घटनाएँ हो रही हैं
- दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री सबसे अधिक जोखिम में हैं
- शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी यह समस्या लगातार बढ़ रही है
आंकड़े भले अलग-अलग हों, लेकिन हकीकत यह है कि आवारा पशु अब सड़क सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं।
⚖️ सर्वोच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इस विषय पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया।
- अदालत ने कहा कि सड़क पर मौतें केवल कुत्तों के काटने से नहीं, बल्कि आवारा पशुओं से टकराने के कारण भी हो रही हैं
- न्यायालय ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई
- यह भी स्पष्ट किया गया कि सड़क सुरक्षा संविधान के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा विषय है
अदालत का संदेश दो टूक था—लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
🏢 प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी इंगित किया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ।
- कई नगर निकायों ने आवारा पशुओं की रोकथाम को प्राथमिकता नहीं दी
- नीतियाँ काग़ज़ पर बनीं, लेकिन क्रियान्वयन में विफल रहीं
- अदालत ने संकेत दिया कि आगे चलकर कठोर आदेश या जवाबदेही तय की जा सकती है
यह टिप्पणी प्रशासनिक तंत्र के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है।
🛠️ समाधान की संभावनाएँ और रास्ते
समस्या बड़ी है, लेकिन समाधान असंभव नहीं।
- आधुनिक तकनीक के माध्यम से पशुओं की पहचान और निगरानी की जा सकती है
- पर्याप्त संख्या में पशु आश्रय और गौशालाएँ विकसित की जानी चाहिए
- पशु छोड़ने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो
- नागरिकों को जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है
सफलता तभी मिलेगी जब नीति, प्रशासन और समाज एक साथ कार्य करें।
✍️ निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी केवल एक कानूनी अवलोकन नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाने वाला संदेश है।
यदि जानवरों के लिए सुरक्षित व्यवस्था होगी, तो इंसानों के लिए भी सड़कें सुरक्षित बनेंगी।
अब सवाल निर्देशों का नहीं, इच्छाशक्ति और क्रियान्वयन का है।
भारत की सड़कें तभी सुरक्षित होंगी, जब उन पर जीवन—चाहे मानव हो या पशु—दोनों का सम्मान किया जाएगा।
