मणिपुर में सुरक्षा एजेंसियों का निर्णायक प्रहार: अवैध हथियार जब्त, तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा

मणिपुर में लंबे समय से जारी अस्थिरता और अवैध गतिविधियों के बीच सुरक्षा बलों ने एक सशक्त संदेश देते हुए व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया है। 8 जनवरी 2026 को राज्य के कई संवेदनशील इलाकों में चलाए गए तलाशी और निगरानी अभियानों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इन अभियानों में न केवल अवैध हथियारों का जखीरा बरामद हुआ, बल्कि उग्रवादी संगठनों और तस्करी से जुड़े अहम लोगों को भी गिरफ्तार किया गया।
अवैध हथियारों पर बड़ा शिकंजा
कांगपोकपी जिले के सोंगजांग (पाकांग) क्षेत्र में पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने गहन तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया, जिसमें स्थानीय रूप से निर्मित हथियारों से लेकर विभिन्न श्रेणी की राइफलें और कारतूस शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह जखीरा किसी संगठित हिंसक गतिविधि के लिए एकत्र किया गया हो सकता था। समय रहते हुई यह बरामदगी संभावित खतरे को टालने में अहम मानी जा रही है।
उग्रवादी गतिविधियों पर कड़ा वार
इम्फाल पूर्वी जिले के खुराई अहोंगई इलाके से प्रतिबंधित संगठन आरपीएफ/पीएलए से जुड़े एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान चंदम रबिचंद्र उर्फ इबोमचा (30 वर्ष) के रूप में हुई है। उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है, जिसकी जांच से नेटवर्क और संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, हथियार तस्करी से जुड़े एक अन्य आरोपी हंगो डिक्सन उर्फ असोन (40 वर्ष) को कंगजोंग जिले से हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसके अंतर-जिला तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
अवैध शराब कारोबार पर भी कार्रवाई
सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर भी सुरक्षा बलों ने सख्ती दिखाई। जिरीबाम जिले के लाटिंगखाल पार्ट-2 क्षेत्र में एक व्यक्ति को बड़ी मात्रा में अवैध रूप से संग्रहित देशी शराब और भारतीय निर्मित विदेशी शराब के साथ पकड़ा गया। यह कार्रवाई राज्य में सामाजिक अपराधों पर नियंत्रण की दिशा में एक और ठोस कदम मानी जा रही है।
निष्कर्ष
मणिपुर में की गई यह व्यापक सुरक्षा कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं हैं। अवैध हथियारों की बरामदगी, उग्रवादी तत्वों की गिरफ्तारी और तस्करी पर रोक से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि शांति भंग करने वाली गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी।
ऐसे अभियानों से न केवल अपराधियों का नेटवर्क कमजोर होता है, बल्कि आम नागरिकों में भरोसा और सुरक्षा की भावना भी मजबूत होती है।
