अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों से ही निकलेगी शांति की राह: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का वैश्विक संदेश

2026 की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपने अंतिम वार्षिक वैश्विक संबोधन के माध्यम से दुनिया को एक गहन आत्ममंथन का अवसर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज मानवता ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ युद्ध, भुखमरी, अन्याय और विस्थापन करोड़ों लोगों के जीवन को अस्थिर बना चुके हैं। उनका यह वक्तव्य केवल चेतावनी नहीं था, बल्कि वैश्विक विवेक को झकझोरने वाली पुकार थी।
🌍 दुनिया के सामने खड़ा अभूतपूर्व संकट
गुटेरेस ने रेखांकित किया कि वर्तमान समय में वैश्विक तनाव असाधारण स्तर पर पहुँच चुके हैं। सशस्त्र संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी ने विश्व व्यवस्था की नींव को कमजोर कर दिया है। विडंबना यह है कि जिस समय वैश्विक एकजुटता सबसे अधिक आवश्यक है, उसी समय सहयोग की भावना बिखरती दिखाई दे रही है।
उनके अनुसार, यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में मानवीय संकट और भी गहरा सकता है।
🕊️ शांति: केवल युद्ध का अंत नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना
महासचिव ने स्पष्ट किया कि शांति को केवल हथियारों की खामोशी तक सीमित नहीं किया जा सकता। सच्ची शांति तब संभव है जब समाज न्याय, समान अवसर और मानव गरिमा के सिद्धांतों पर खड़ा हो। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकार किसी भी शांति प्रक्रिया के मूल स्तंभ होने चाहिए।
उनका संदेश था—शांति की खोज एक निरंतर प्रक्रिया है, और इससे पीछे हटना मानवता के भविष्य से समझौता करने जैसा होगा।
⚖️ वैश्विक नेतृत्व की परीक्षा
अपने संबोधन में गुटेरेस ने विश्व नेतृत्व की भूमिका पर भी कड़ा प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि संकीर्ण राष्ट्रीय हित, राजनीतिक ध्रुवीकरण और वित्तीय योगदान में कटौती जैसी नीतियाँ वैश्विक संस्थाओं को कमजोर कर रही हैं। विशेष रूप से उन्होंने उन देशों की ओर संकेत किया जो संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों से दूरी बना रहे हैं।
उनके अनुसार, सच्चा नेतृत्व सत्ता के प्रदर्शन में नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी निभाने में दिखाई देता है।
🌱 परिवर्तन ही अस्तित्व की शर्त
गुटेरेस ने स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र को भी समय के साथ खुद को ढालना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक संस्थाएँ बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को नहीं सुधारेंगी, तो उनकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना तय है। अपने अंतिम कार्यकाल को उन्होंने शांति, सुधार और मानवीय मूल्यों के लिए समर्पित करने का संकल्प दोहराया।
✍️ सार
एंटोनियो गुटेरेस का यह संदेश किसी एक देश या संस्था तक सीमित नहीं था। यह पूरी मानवता के नाम एक आह्वान था—कि जब तक दुनिया में एक भी व्यक्ति अन्याय, भूख या भय में जी रहा है, तब तक शांति का अभियान अधूरा है। शांति कोई कल्पना नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी है, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के मजबूत आधार पर ही साकार किया जा सकता है।
