बहराइच के सुजौली में धूमधाम से मनाई गई वीरांगना फूलन देवी की जयंती, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश

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विशेषज्ञ राय:
बहराइच के सुजौली में वीरांगना फूलन देवी की जयंती का आयोजन सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद का अवसर प्रदान करता है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए समाज के वंचित वर्गों के अधिकार, महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और समान अवसर जैसे विषयों को स्थानीय स्तर पर मजबूती से उठाया जा सकता है।

अमृत पाल सिंह बहराइच

रिपोर्टर हिट एंड हॉट न्यूज़

दिनांक 10 अगस्त 2026

बहराइच। जिले के सुजौली क्षेत्र स्थित जंगल गुलरिया में वीरांगना फूलन देवी की जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान फूलन देवी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और उनके जीवन से जुड़े संघर्षों को याद करते हुए सामाजिक न्याय, समानता तथा महिला सम्मान का संदेश दिया गया।

समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति तभी संभव है, जब उसमें कमजोर और वंचित वर्गों को भी सम्मान, अधिकार और अवसर मिलें। वक्ताओं ने फूलन देवी के जीवन को संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में याद करते हुए कहा कि उनके नाम से जुड़े कार्यक्रमों को महिलाओं और वंचित समुदायों के अधिकारों पर सकारात्मक चर्चा का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

जंगल गुलरिया में जुटे बड़ी संख्या में लोग

जंगल गुलरिया में आयोजित जयंती समारोह को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले लोगों ने फूलन देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। आयोजन में क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की भी मौजूदगी रही।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्थानीय लोगों की ओर से फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। मंच से वक्ताओं ने सामाजिक समानता और अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। समारोह का माहौल श्रद्धा और सामाजिक जागरूकता के संदेश से जुड़ा रहा।

मुख्य अतिथि बंसीधर बौद्ध ने किया संबोधन

समारोह में बंसीधर बौद्ध मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ कई प्रमुख अतिथियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। आयोजकों और स्थानीय नागरिकों ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति के लिए आभार जताया।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि इतिहास और समाज में उन व्यक्तित्वों को याद करना जरूरी है, जिनका जीवन कठिन परिस्थितियों और संघर्षों से जुड़ा रहा हो। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारियों और अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी होना चाहिए।

पूर्व विधायक रमेश गौतम की मौजूदगी

कार्यक्रम में पूर्व विधायक रमेश गौतम भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। समारोह में उनकी उपस्थिति ने आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाया। मंच से सामाजिक न्याय और समानता की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

वक्ताओं ने कहा कि समाज में किसी भी तरह के भेदभाव और असमानता को दूर करने के लिए लोगों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना होगा। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी को समान अवसरों से जोड़ते हुए उन्होंने युवाओं और महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

महिला सशक्तिकरण पर रहा विशेष जोर

जयंती समारोह में महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण प्रमुख विषयों में शामिल रहे। राष्ट्रीय महिला सचिव रेखा राव ने महिलाओं को आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। जब महिलाएं शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से अपने अधिकारों को समझती हैं, तो वे परिवार और समाज दोनों में बेहतर भूमिका निभा सकती हैं।

कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि महिला सशक्तिकरण केवल राजनीतिक भाषणों या सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं होना चाहिए। समाज में महिलाओं को बराबरी का सम्मान और निर्णय लेने का अवसर मिलना भी उतना ही आवश्यक है।

सावित्री बाई फुले ने सामाजिक सम्मान की बात रखी

समारोह की विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद सावित्री बाई फुले ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, सामाजिक समानता और स्वाभिमान के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा, जागरूकता और आत्मविश्वास को प्राथमिकता देनी चाहिए। समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से सामाजिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।

फूलन देवी की जयंती के अवसर पर उनके जीवन और संघर्ष को याद करते हुए वक्ताओं ने यह भी कहा कि समाज में मौजूद असमानताओं पर संवाद जरूरी है। किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को याद करते समय उसके जीवन से जुड़े विभिन्न सामाजिक पहलुओं को समझना आवश्यक है।

शोषित और वंचित वर्गों के अधिकारों की चर्चा

कार्यक्रम में वक्ताओं ने शोषित, पीड़ित और वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर उपलब्ध कराना है।

वक्ताओं के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच बेहद महत्वपूर्ण है। यदि समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते हैं, तो इससे पूरे क्षेत्र का विकास संभव होता है।

सभा में मौजूद लोगों से अपील की गई कि वे अपने आसपास होने वाले अन्याय और भेदभाव के खिलाफ लोकतांत्रिक तथा शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएं। साथ ही कानून और संविधान में दिए गए अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दिया गया।

युवाओं को इतिहास से सीख लेने की अपील

समारोह के दौरान युवाओं की भूमिका पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास के संघर्षों और सामाजिक बदलावों को समझने की जरूरत है। केवल किसी व्यक्तित्व की जयंती मनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके संदर्भ और समाज पर पड़े प्रभाव को समझना भी जरूरी है।

युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज में भाईचारे को मजबूत करने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज की पीढ़ी यदि सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े तो सामाजिक बदलाव को मजबूत आधार मिल सकता है।

स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

जंगल गुलरिया के स्थानीय नागरिकों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की। ग्रामीणों ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण रहा।

स्थानीय स्तर पर इस तरह के सामाजिक आयोजनों को लोगों के बीच संवाद और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी माना जाता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

हरिपाल सिंह ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर जंगल गुलरिया के पूर्व प्रधान हरिपाल सिंह ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में भी सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में सहयोग की उम्मीद जताई।

सामाजिक संदेश के साथ संपन्न हुआ समारोह

फूलन देवी की जयंती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सामाजिक न्याय, महिला सम्मान, समानता और अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। समारोह में मौजूद वक्ताओं ने समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने और महिलाओं को सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन के अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ। आयोजन से जुड़े लोगों ने कहा कि सामाजिक महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की स्मृति में होने वाले कार्यक्रम समाज को जागरूक करने का माध्यम बन सकते हैं। इसके जरिए नई पीढ़ी को समानता, शिक्षा, अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया जा सकता है।

कुल मिलाकर, बहराइच के सुजौली स्थित जंगल गुलरिया में मनाई गई फूलन देवी की जयंती ने सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों और स्थानीय लोगों ने उनके चित्र पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महिलाओं के सम्मान तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। समारोह का उद्देश्य फूलन देवी की स्मृति को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में समानता और स्वाभिमान की भावना को मजबूत करना रहा।

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