दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर, विद्यार्थियों को बताए सुरक्षा और अधिकारों के सूत्र
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई (जालौन)। बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, उरई में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष विधिक साक्षरता एवं जागरूकता अभियान के तहत आयोजित हुआ। अभियान 25 सितंबर से 02 अक्टूबर तक संचालित किया जा रहा है।

महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें कानून की बुनियादी जानकारी देने के साथ-साथ सुरक्षित व्यवहार के व्यावहारिक उपाय भी बताए। शिविर में विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा, पॉक्सो अधिनियम-2012, बाल अधिकार, गुड टच-बैड टच, साइबर सुरक्षा और निःशुल्क कानूनी सहायता जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा पर दिया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रथम सिविल जज सीनियर डिवीजन शांभवी ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट-2012 के उद्देश्य और उसके प्रमुख प्रावधानों के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों, यौन शोषण, उत्पीड़न तथा पोर्नोग्राफी से जुड़े अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने अधिकारों के बारे में जानकारी रखना उनकी सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी बच्चे को किसी व्यक्ति के व्यवहार से असहजता महसूस हो अथवा वह किसी संदिग्ध परिस्थिति का सामना करे तो उसे डरकर चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में माता-पिता, शिक्षक या किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति से तुरंत सहायता लेने की जरूरत है।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया कि किसी भी अनुचित व्यवहार को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। समय रहते जानकारी देने से संभावित परेशानी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।
हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चन्द्रा ने विद्यार्थियों को संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के बारे में जानकारी दी। उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन सेवा 112 के उपयोग के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि बच्चों को किसी परेशानी, खतरे या असुरक्षित परिस्थिति का सामना होने पर उसे अपने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित सहायता सेवा से संपर्क करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए उठाया गया जिम्मेदार कदम है।
ऑनलाइन दुनिया में सावधानी जरूरी
सिविल जज जूनियर डिवीजन अंकिता सिंह ने बच्चों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बच्चों के सामने ऑनलाइन सुरक्षा की नई चुनौतियां भी मौजूद हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी साझा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि मोबाइल नंबर, पता, पासवर्ड, निजी तस्वीरें और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति या संदेश को विश्वसनीय मान लेना उचित नहीं है। किसी संदिग्ध लिंक, संदेश या ऑनलाइन गतिविधि के सामने आने पर सावधानी बरतना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर भी समझाया और कहा कि बच्चों को अपने शरीर तथा व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति ऐसा व्यवहार करता है जिससे बच्चा असहज महसूस करे तो उस स्थिति को नजरअंदाज करने के बजाय किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी
सिविल जज जूनियर डिवीजन उरई प्रत्यूष प्रकाश ने विद्यार्थियों को पॉक्सो कानून से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति को कानूनी समस्या का सामना करना पड़ता है तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सहायता प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को जनपद न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय की भूमिका के बारे में बताया। साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कानूनी जानकारी केवल अदालतों या अधिवक्ताओं तक सीमित विषय नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में सामान्य जानकारी होनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाया जा सके।
लोक अदालत और समझौता केंद्र की जानकारी
सिविल जज जूनियर डिवीजन अनिरुद्ध सिंह ने भी विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया।
उन्होंने लोक अदालत और सुलह-समझौता केंद्र के माध्यम से विवादों के समाधान की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आम लोगों को उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न कानूनी सुविधाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया गया।
उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी समाज में जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। जब लोगों को अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी होती है तो वे कठिन परिस्थितियों में बेहतर तरीके से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रबंधक शत्रुघ्न ने उपस्थित न्यायिक अधिकारियों और विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के बीच इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने से उनमें कानून के प्रति समझ विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने अधिकारों, कर्तव्यों और व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में भी जानकारी मिलनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रम बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें संभावित जोखिमों के प्रति सचेत करने में उपयोगी साबित होते हैं।
कार्यक्रम का संचालन पीएलवी महेश सिंह परिहार ने किया। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य सुमेशचंद्र मिश्रा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी मनीषा चतुर्वेदी, महेश सिंह परिहार, महेन्द्र कुमार मिश्रा, योगेन्द्र सिंह तखेले, धर्मेन्द्र कुमार और रामदेव चतुर्वेदी सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
जागरूकता से मजबूत होगी बच्चों की सुरक्षा
विधिक जागरूकता शिविर का मुख्य संदेश यही रहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को कानून, हेल्पलाइन सेवाओं और अपने अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में सही कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।
दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कानून की जानकारी के साथ-साथ यह भी समझाया गया कि किसी भी असुरक्षित स्थिति में चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति से सहायता लेना जरूरी है। साइबर दुनिया में सावधानी, व्यक्तिगत सीमाओं की समझ और कानूनी अधिकारों की जानकारी बच्चों को अधिक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस प्रकार का अभियान विद्यालयों में विद्यार्थियों और कानून से जुड़े अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इससे बच्चों को कानूनी विषयों को सरल भाषा में समझने का मौका मिलता है और उनमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित होती है।