जालौन में नए एसपी सुरेश चंद्र रावत ने संभाली कमान, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा; फरियादियों को मिलेगी ‘भरोसा पर्ची’

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा आम नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवागत पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने शुक्रवार को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। पदभार संभालते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध नियंत्रण, वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाना पुलिस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि शासन की मंशा के अनुरूप काम करते हुए कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।

नए पुलिस अधीक्षक ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिले की पुलिस व्यवस्था, लंबित मुकदमों और अपराध नियंत्रण से संबंधित विषयों पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों का भरोसा मजबूत हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें थानों में सम्मानपूर्वक सुनवाई मिल सके। अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।

1999 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं सुरेश चंद्र रावत

पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत वर्ष 1999 बैच के प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) अधिकारी हैं। वह मूल रूप से सीतापुर जिले के निवासी हैं। अपने सेवाकाल में वह विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। मथुरा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर भी उन्होंने सेवाएं दी हैं। पदोन्नति के बाद उन्हें जालौन जिले की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिले में नई जिम्मेदारी संभालने के साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकताओं के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस को सक्रिय, जवाबदेह और सतर्क रहना होगा। केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की आशंका वाले मामलों पर समय रहते ध्यान देना भी आवश्यक है।

थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर दिए निर्देश

कार्यभार ग्रहण करने के बाद एसपी ने सभी थाना प्रभारियों और विभिन्न पुलिस शाखाओं के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में आगामी त्योहारों की तैयारियों, जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति, वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी तथा लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा की गई।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम समय से उठाए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और किसी भी संभावित विवाद या अव्यवस्था की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पुलिसकर्मियों को क्षेत्र में सक्रिय रहने, स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने और नागरिकों के साथ संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

एसपी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को शासन और पुलिस महानिदेशक की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करना होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर उसे गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नहीं, बल्कि प्रत्येक पुलिसकर्मी की है।

छह साल पुराने गैर-जमानती वारंटों पर होगी कार्रवाई

नवागत पुलिस अधीक्षक ने लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंटों को लेकर विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पिछले छह वर्षों से लंबित ऐसे वारंटों की समीक्षा की जाए और संबंधित आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।

उनका मानना है कि न्यायालयों से जारी वारंटों का समय पर पालन करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए थाना स्तर पर लंबित वारंटों का विवरण तैयार कर उनकी स्थिति की जांच की जाए और प्रत्येक मामले में नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।

एसपी ने वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी को भी प्राथमिकता देने की बात कही। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई तेज की जाए। पुलिस की सक्रियता से अपराधियों पर दबाव बढ़ाने और कानून के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

अपराध से अर्जित अवैध संपत्ति पर भी नजर

अपराध के माध्यम से अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ भी पुलिस सख्त रुख अपनाएगी। एसपी सुरेश चंद्र रावत ने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की जानकारी जुटाई जाए, जिनमें अपराध से प्राप्त धन या संपत्ति अर्जित किए जाने की आशंका हो। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जहां जांच में अपराध से अर्जित संपत्ति के पर्याप्त साक्ष्य मिलें, वहां संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को मामलों की गंभीरता से जांच करने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए गए।

पुलिस की इस प्राथमिकता का उद्देश्य संगठित अपराध और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े लोगों पर प्रभावी अंकुश लगाना है। हालांकि, संपत्ति संबंधी किसी भी कार्रवाई में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

थानों में फरियादियों को मिलेगी ‘भरोसा पर्ची’

नवागत एसपी की प्राथमिकताओं में जनसुनवाई व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रमुख रूप से शामिल है। उन्होंने थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के लिए ‘भरोसा पर्ची’ देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही। इस पहल का उद्देश्य शिकायतकर्ता को अपनी समस्या के निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराना और पुलिस व्यवस्था के प्रति उसका विश्वास बढ़ाना है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फरियादी को दी जाने वाली पर्ची पर संबंधित जांच अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। इससे शिकायतकर्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि उसकी शिकायत किस अधिकारी के पास है। जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारी से संपर्क कर अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेगा।

इस व्यवस्था से शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ने और फरियादियों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है। साथ ही जांच अधिकारी की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रहेगी, जिससे शिकायतों की प्रगति पर नजर रखना आसान हो सकेगा।

शिकायत की अनदेखी पर थानाध्यक्षों की जवाबदेही

एसपी सुरेश चंद्र रावत ने स्पष्ट किया कि थानों में आने वाले लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी फरियादी की समस्या नहीं सुनी जाती, नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती या उसे अपनी शिकायत लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंचना पड़ता है, तो संबंधित थानाध्यक्ष की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनशिकायतों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर और प्रभावी तरीके से किया जाए। शिकायत की प्रकृति के अनुसार आवश्यक जांच की जाए और पीड़ित को कार्रवाई के संबंध में उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

एसपी की इस पहल से थाना स्तर पर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। यदि व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो शिकायतकर्ताओं को अपनी समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। साथ ही पुलिस अधिकारियों को भी लंबित शिकायतों की निगरानी करने में मदद मिलेगी।

अपराध नियंत्रण के साथ जनता का भरोसा जीतने पर जोर

जालौन में नए पुलिस अधीक्षक के सामने अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों का निस्तारण और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। कार्यभार संभालते ही उन्होंने इन सभी विषयों पर सक्रियता दिखाते हुए अधिकारियों को प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए हैं।

छह साल से लंबित गैर-जमानती वारंटों की समीक्षा, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी, अवैध संपत्ति के मामलों में कानूनी कार्रवाई और थानों में ‘भरोसा पर्ची’ की व्यवस्था उनकी कार्ययोजना के प्रमुख बिंदु हैं। इन कदमों का वास्तविक असर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।

जिले के नागरिकों की अपेक्षा है कि पुलिस उनकी शिकायतों पर संवेदनशीलता से कार्रवाई करे और अपराधियों के खिलाफ निष्पक्ष तरीके से कानून लागू करे। अब देखना होगा कि नवागत एसपी के निर्देशों के बाद थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है और आम लोगों को जनसुनवाई तथा न्याय प्राप्त करने में कितनी सुविधा मिलती है।

निष्कर्ष: पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने पदभार ग्रहण करते ही अपराधियों पर शिकंजा कसने और फरियादियों को बेहतर सुनवाई देने का संदेश दिया है। ‘भरोसा पर्ची’ की व्यवस्था और लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की पहल से जालौन पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है। इन निर्देशों का प्रभावी पालन जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस-जनता के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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जालौन में नए एसपी सुरेश चंद्र रावत ने संभाली कमान, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा; फरियादियों को मिलेगी ‘भरोसा पर्ची’

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 10, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

उरई (जालौन)। जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा आम नागरिकों की शिकायतों का प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवागत पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने शुक्रवार को अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया। पदभार संभालते ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध नियंत्रण, वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाना पुलिस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि शासन की मंशा के अनुरूप काम करते हुए कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए।

नए पुलिस अधीक्षक ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिले की पुलिस व्यवस्था, लंबित मुकदमों और अपराध नियंत्रण से संबंधित विषयों पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिससे आम लोगों का भरोसा मजबूत हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें थानों में सम्मानपूर्वक सुनवाई मिल सके। अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।

1999 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं सुरेश चंद्र रावत

पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत वर्ष 1999 बैच के प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) अधिकारी हैं। वह मूल रूप से सीतापुर जिले के निवासी हैं। अपने सेवाकाल में वह विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। मथुरा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के पद पर भी उन्होंने सेवाएं दी हैं। पदोन्नति के बाद उन्हें जालौन जिले की पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जिले में नई जिम्मेदारी संभालने के साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकताओं के आधार पर कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस को सक्रिय, जवाबदेह और सतर्क रहना होगा। केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की आशंका वाले मामलों पर समय रहते ध्यान देना भी आवश्यक है।

थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर दिए निर्देश

कार्यभार ग्रहण करने के बाद एसपी ने सभी थाना प्रभारियों और विभिन्न पुलिस शाखाओं के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में आगामी त्योहारों की तैयारियों, जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति, वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी तथा लंबे समय से लंबित मामलों की समीक्षा की गई।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम समय से उठाए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाए और किसी भी संभावित विवाद या अव्यवस्था की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पुलिसकर्मियों को क्षेत्र में सक्रिय रहने, स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने और नागरिकों के साथ संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

एसपी ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को शासन और पुलिस महानिदेशक की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करना होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर उसे गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल वरिष्ठ अधिकारियों की नहीं, बल्कि प्रत्येक पुलिसकर्मी की है।

छह साल पुराने गैर-जमानती वारंटों पर होगी कार्रवाई

नवागत पुलिस अधीक्षक ने लंबे समय से लंबित गैर-जमानती वारंटों को लेकर विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पिछले छह वर्षों से लंबित ऐसे वारंटों की समीक्षा की जाए और संबंधित आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।

उनका मानना है कि न्यायालयों से जारी वारंटों का समय पर पालन करना पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए थाना स्तर पर लंबित वारंटों का विवरण तैयार कर उनकी स्थिति की जांच की जाए और प्रत्येक मामले में नियमानुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।

एसपी ने वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी को भी प्राथमिकता देने की बात कही। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई तेज की जाए। पुलिस की सक्रियता से अपराधियों पर दबाव बढ़ाने और कानून के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

अपराध से अर्जित अवैध संपत्ति पर भी नजर

अपराध के माध्यम से अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ भी पुलिस सख्त रुख अपनाएगी। एसपी सुरेश चंद्र रावत ने निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की जानकारी जुटाई जाए, जिनमें अपराध से प्राप्त धन या संपत्ति अर्जित किए जाने की आशंका हो। तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर संबंधित मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जहां जांच में अपराध से अर्जित संपत्ति के पर्याप्त साक्ष्य मिलें, वहां संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को मामलों की गंभीरता से जांच करने और आवश्यक दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए गए।

पुलिस की इस प्राथमिकता का उद्देश्य संगठित अपराध और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े लोगों पर प्रभावी अंकुश लगाना है। हालांकि, संपत्ति संबंधी किसी भी कार्रवाई में कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

थानों में फरियादियों को मिलेगी ‘भरोसा पर्ची’

नवागत एसपी की प्राथमिकताओं में जनसुनवाई व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रमुख रूप से शामिल है। उन्होंने थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों के लिए ‘भरोसा पर्ची’ देने की व्यवस्था लागू करने की बात कही। इस पहल का उद्देश्य शिकायतकर्ता को अपनी समस्या के निस्तारण की प्रक्रिया से अवगत कराना और पुलिस व्यवस्था के प्रति उसका विश्वास बढ़ाना है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फरियादी को दी जाने वाली पर्ची पर संबंधित जांच अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज होगा। इससे शिकायतकर्ता को यह जानकारी मिल सकेगी कि उसकी शिकायत किस अधिकारी के पास है। जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारी से संपर्क कर अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेगा।

इस व्यवस्था से शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता बढ़ने और फरियादियों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है। साथ ही जांच अधिकारी की जिम्मेदारी भी स्पष्ट रहेगी, जिससे शिकायतों की प्रगति पर नजर रखना आसान हो सकेगा।

शिकायत की अनदेखी पर थानाध्यक्षों की जवाबदेही

एसपी सुरेश चंद्र रावत ने स्पष्ट किया कि थानों में आने वाले लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी फरियादी की समस्या नहीं सुनी जाती, नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती या उसे अपनी शिकायत लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंचना पड़ता है, तो संबंधित थानाध्यक्ष की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। लापरवाही सामने आने पर नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनशिकायतों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर और प्रभावी तरीके से किया जाए। शिकायत की प्रकृति के अनुसार आवश्यक जांच की जाए और पीड़ित को कार्रवाई के संबंध में उचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

एसपी की इस पहल से थाना स्तर पर जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। यदि व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो शिकायतकर्ताओं को अपनी समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। साथ ही पुलिस अधिकारियों को भी लंबित शिकायतों की निगरानी करने में मदद मिलेगी।

अपराध नियंत्रण के साथ जनता का भरोसा जीतने पर जोर

जालौन में नए पुलिस अधीक्षक के सामने अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों का निस्तारण और जनसुनवाई व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। कार्यभार संभालते ही उन्होंने इन सभी विषयों पर सक्रियता दिखाते हुए अधिकारियों को प्राथमिकताओं के अनुरूप काम करने के निर्देश दिए हैं।

छह साल से लंबित गैर-जमानती वारंटों की समीक्षा, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी, अवैध संपत्ति के मामलों में कानूनी कार्रवाई और थानों में ‘भरोसा पर्ची’ की व्यवस्था उनकी कार्ययोजना के प्रमुख बिंदु हैं। इन कदमों का वास्तविक असर उनके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।

जिले के नागरिकों की अपेक्षा है कि पुलिस उनकी शिकायतों पर संवेदनशीलता से कार्रवाई करे और अपराधियों के खिलाफ निष्पक्ष तरीके से कानून लागू करे। अब देखना होगा कि नवागत एसपी के निर्देशों के बाद थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली में कितना सुधार आता है और आम लोगों को जनसुनवाई तथा न्याय प्राप्त करने में कितनी सुविधा मिलती है।

निष्कर्ष: पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र रावत ने पदभार ग्रहण करते ही अपराधियों पर शिकंजा कसने और फरियादियों को बेहतर सुनवाई देने का संदेश दिया है। ‘भरोसा पर्ची’ की व्यवस्था और लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की पहल से जालौन पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की उम्मीद है। इन निर्देशों का प्रभावी पालन जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस-जनता के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।