मांगों को लेकर लेखपालों ने भरी हुंकार, 17 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। लंबित मांगों के समाधान को लेकर उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने आंदोलन का रुख और तेज करने का ऐलान किया है। शनिवार को उरई स्थित सदर तहसील परिसर में लेखपालों ने सुबह से शाम तक धरना देकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध जताया। धरने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने शासन से लंबे समय से लंबित मामलों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। इसके बाद लेखपालों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं के निराकरण की मांग उठाई।

धरने का नेतृत्व उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अनूप कुमार तिवारी, सदर तहसील अध्यक्ष अश्वनी कुमार गुप्ता और तहसील मंत्री वीर सिंह ने किया। बड़ी संख्या में लेखपाल तहसील परिसर में एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। संगठन पदाधिकारियों का कहना था कि राजस्व विभाग से जुड़े कार्यों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके अनुपात में कर्मचारियों की सुविधाओं और सेवा संबंधी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।
बढ़ते कार्यभार के बीच लंबित मांगों को लेकर नाराजगी
धरने में वक्ताओं ने कहा कि लेखपालों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। भूमि संबंधी अभिलेखों से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं, राजस्व कार्यों, प्रमाणपत्रों और प्रशासनिक दायित्वों में लेखपालों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद सेवा संबंधी कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।
जिलाध्यक्ष अनूप कुमार तिवारी ने कहा कि संगठन लगातार शासन और विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखता रहा है। उनका कहना था कि मांगों पर समयबद्ध तरीके से निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान की दिशा में कदम उठाने की अपील की।
वेतनमान और वेतन विसंगति दूर करने की मांग
लेखपाल संघ की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान को लेवल-5 यानी ग्रेड पे 2800 के अनुरूप किए जाने का मुद्दा शामिल है। संगठन का कहना है कि वेतनमान से संबंधित विसंगतियों का समाधान किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही कर्मचारियों की सेवा संबंधी अन्य समस्याओं को भी दूर करने की मांग की गई है।
लेखपालों ने अंतर्मंडलीय स्थानांतरण के लिए पोर्टल दोबारा खोले जाने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि स्थानांतरण से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को उचित अवसर मिलना चाहिए, ताकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत वे अपनी समस्याओं का समाधान करा सकें।
लंबित पदोन्नति और स्थायीकरण का मुद्दा
ज्ञापन में चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
इसके साथ ही नवनियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा का परिणाम जारी कर उनके स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि विभागीय परीक्षा और स्थायीकरण से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई होने से कर्मचारियों को अपनी सेवा स्थिति को लेकर स्पष्टता मिल सकेगी।
भत्तों में बढ़ोतरी की मांग
लेखपालों ने विभिन्न भत्तों में संशोधन की मांग भी ज्ञापन में शामिल की है। संघ की ओर से स्टेशनरी भत्ते को वर्तमान 100 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की गई है। इसी तरह वाहन भत्ते को 1500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग रखी गई।
विशेष भत्ते को भी 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई है। संगठन का तर्क है कि फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार के संसाधनों और आवागमन से संबंधित खर्चों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मौजूदा भत्तों में आवश्यक संशोधन किए जाने की जरूरत है।
अतिरिक्त जिम्मेदारियों से राहत की मांग
धरने के दौरान लेखपालों ने पटल सहायक तथा प्रभारी राजस्व निरीक्षक का कार्य कर रहे लेखपालों को इन अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मुक्त करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि लेखपालों पर पहले से ही विभिन्न प्रकार के विभागीय और मैदानी कार्यों का दबाव रहता है। ऐसे में अतिरिक्त दायित्वों के कारण नियमित काम प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
इसके अलावा ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। संघ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को बुनियादी सुविधाएं मिलने से सरकारी कार्यों को अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
तकनीकी पद घोषित करने और डिजिटल उपकरण देने की मांग
लेखपाल संघ ने अपने पद को तकनीकी पद घोषित किए जाने की मांग भी रखी। संगठन का कहना है कि राजस्व विभाग में कामकाज तेजी से डिजिटल हो रहा है। ऑनलाइन रिकॉर्ड, विभिन्न पोर्टलों और डिजिटल माध्यमों से जुड़े कार्यों में लेखपालों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इसी को देखते हुए लेखपालों को लैपटॉप और मोबाइल उपलब्ध कराने की मांग की गई। संघ का कहना है कि आधुनिक तकनीकी संसाधन मिलने से ऑनलाइन कार्यों को समय पर पूरा करने और विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा
धरने के बाद लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सभी प्रमुख मांगों को शामिल करते हुए शासन से जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया गया। लेखपालों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगी।
धरने में संगठन से जुड़े बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। इनमें जिलाध्यक्ष अनूप कुमार तिवारी, तहसील अध्यक्ष अश्वनी कुमार गुप्ता, तहसील मंत्री वीर सिंह के अलावा रौनक वर्मा, दिव्यांश मिश्रा, पवन श्रीवास्तव, संजय चौरसिया, सुमित निरंजन, अनिल, आदर्श चौहान, रोशनी अहिरवार, शालिनी तिवारी, किरन तिवारी, आशीष चौधरी, आशीष गुप्ता, विवेक राठौर और मुकतेंद्र सिंह समेत अन्य लेखपाल शामिल रहे।
17 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
धरने के दौरान संगठन ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दी। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 17 अक्टूबर से प्रदेशभर के लेखपाल संपूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू करेंगे।
लेखपालों के इस ऐलान के बाद अब शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी। संगठन का कहना है कि उसकी कोशिश बातचीत और ज्ञापन के माध्यम से समस्याओं का समाधान कराने की है, लेकिन यदि मांगें लंबित रहती हैं तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
फिलहाल सदर तहसील में हुए धरने के जरिए लेखपालों ने अपनी सेवा संबंधी समस्याओं और कार्य परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और प्रस्तावित कार्य बहिष्कार को टालने के लिए कोई पहल होती है या नहीं।