फ़रवरी 14, 2026

उत्तराखंड पुलिस की त्वरित कार्रवाई: रायवाला, विकासनगर और पटेलनगर में नाबालिगों से दुष्कर्म के आरोपियों की गिरफ्तारी

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Anoop singh

देहरादून, 11 जून 2025 — उत्तराखंड पुलिस ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अपने प्रयासों में एक और मजबूत कदम उठाया है। देहरादून ज़िले के रायवाला, विकासनगर और पटेलनगर थाना क्षेत्रों में नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए दुष्कर्म के मामलों में तीन अलग-अलग आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की यह सख्त कार्रवाई इस बात की ओर इशारा करती है कि राज्य में महिला व बाल अधिकारों के हनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामलों का विवरण:

  1. रायवाला क्षेत्र की घटना: एक युवक ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। पीड़िता के परिजनों की शिकायत पर रायवाला थाने की पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और आरोपी को पकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचाया।
  2. विकासनगर की घटना: विकासनगर में आरोपी ने नाबालिग से विवाह करने का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया और बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने बाल विवाह निषेध अधिनियम और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के अंतर्गत अभियुक्त को गिरफ्तार किया।
  3. पटेलनगर का संवेदनशील मामला: पटेलनगर क्षेत्र में नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और पीड़िता को चिकित्सकीय एवं कानूनी सहायता प्रदान की जा रही है।

पुलिस की भूमिका सराहनीय:

उत्तराखंड पुलिस द्वारा किए गए इस त्वरित और सटीक अभियान ने एक बार फिर दिखा दिया है कि कानून के शिकंजे से कोई भी अपराधी नहीं बच सकता। पुलिस ने इन मामलों में आईपीसी, पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया है।

जनता से अपील:

उत्तराखंड पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई भी व्यक्ति बच्चों या महिलाओं के साथ हो रहे अपराध की जानकारी रखता है, तो वह बिना किसी डर के तुरंत पुलिस को सूचना दे। पुलिस की मदद से कई मासूमों की जिंदगी को बचाया जा सकता है।


निष्कर्ष:

रायवाला, विकासनगर और पटेलनगर की इन तीन घटनाओं में पुलिस की कार्यवाही एक उदाहरण है कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, उत्तराखंड पुलिस सतर्क और संवेदनशील बनी हुई है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ महिलाएँ और बालिकाएँ खुद को सुरक्षित महसूस करें।


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