बैडमिंटन का इतिहास: पूना से ओलंपिक तक की प्रेरणादायक यात्रा

बैडमिंटन आज एक लोकप्रिय रैकेट खेल बन चुका है, जिसे दुनिया भर में बड़े उत्साह के साथ खेला जाता है। इसकी शुरुआत का सफर बहुत ही रोचक और ऐतिहासिक रहा है, जो भारत के एक क्षेत्रीय खेल से शुरू होकर वैश्विक मंच तक पहुँचा।
19वीं शताब्दी के मध्य में भारत में तैनात ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने अपने मनोरंजन के लिए एक खेल खेलना शुरू किया, जिसे उस समय “पूना” कहा जाता था। यह खेल आज के पुणे शहर में खासा लोकप्रिय था। इसमें एक शटलकॉक और रैकेट जैसी वस्तुओं का प्रयोग होता था, और खिलाड़ियों का उद्देश्य उसे हवा में बनाए रखना होता था। यही “पूना” खेल बैडमिंटन का प्रारंभिक स्वरूप माना जाता है।
जब ब्रिटिश अधिकारी भारत से वापस इंग्लैंड लौटे, तो वे इस खेल को अपने साथ ले गए। वर्ष 1873 में इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशायर स्थित ‘बैडमिंटन हाउस’ नामक संपत्ति पर आयोजित एक सामाजिक समारोह में इस खेल को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया। इसी स्थान के नाम पर इस खेल का नाम ‘बैडमिंटन’ रखा गया।
जल्द ही इस खेल को संरचित करने की दिशा में पहल की गई। 1870 के दशक में ‘बैडमिंटन क्लब ऑफ बाथ’ ने इस खेल के नियम तैयार किए और इसे एक मानकीकृत रूप प्रदान किया। इसके बाद, 1893 में इंग्लैंड में बैडमिंटन एसोसिएशन की स्थापना की गई, जिसने आधिकारिक नियमावली प्रकाशित की और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएँ आयोजित करनी शुरू कीं। पहली “ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैंपियनशिप” 1899 में आयोजित की गई, जो आज भी एक अत्यंत प्रतिष्ठित प्रतियोगिता मानी जाती है।
20वीं सदी के प्रारंभ में यह खेल ब्रिटिश उपनिवेशों और अन्य देशों जैसे कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आयरलैंड, अमेरिका, स्कॉटलैंड और न्यूजीलैंड तक फैल गया। वर्ष 1934 में ‘इंटरनेशनल बैडमिंटन फेडरेशन’ (IBF) की स्थापना हुई, जिसे अब बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) कहा जाता है।
बैडमिंटन को ओलंपिक खेलों में पहली बार वर्ष 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में शामिल किया गया, जिससे इसकी लोकप्रियता को नया आयाम मिला। आज बैडमिंटन न केवल एक प्रतिस्पर्धात्मक खेल है बल्कि यह स्वास्थ्य, फुर्ती और रणनीति का प्रतीक भी बन चुका है।
छोटे से पूना के खेल से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचना बैडमिंटन की एक शानदार ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाता है।
