फ़रवरी 12, 2026

संस्कृति मंत्रालय का “अमृत परंपरा” महोत्सव: कला और संस्कृति की साझा धरोहर से जुड़ा भारत

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संस्कृति मंत्रालय ने अपने विशेष महोत्सव श्रृंखला “अमृत परंपरा” के माध्यम से भारतीय कला और संस्कृति की साझी विरासत से पूरे देश को जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। 2 नवंबर को भव्य उद्घाटन के बाद इस श्रृंखला का पहला कार्यक्रम “कावेरी मिलती है गंगा से” ने अपने दूसरे दिन भी कर्तव्य पथ और CCRT द्वारका में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना के साथ भारत की पारंपरिक और लोक कलाओं को प्रस्तुत किया।

संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त संस्थानों – संगीत नाटक अकादमी, कलाक्षेत्र और CCRT के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव श्रृंखला का उद्देश्य दक्षिण भारतीय संगीत और नृत्य को उत्तर भारत में लाना और उत्तर की कला परंपराओं का भी उत्सव मनाना है। 2 से 5 नवंबर 2024 तक आयोजित इस “कावेरी मिलती है गंगा से” कार्यक्रम की प्रेरणा चेन्नई के प्रतिष्ठित “मार्गज़ी महोत्सव” से ली गई है। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की विविधता का सम्मान करते हुए उसकी पारंपरिक और लोक कलाओं को एक समर्पित श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत करता है।

इस महोत्सव के माध्यम से न केवल भारत के उत्तर और दक्षिण की कलाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है, बल्कि दोनों क्षेत्रों के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। “अमृत परंपरा” का यह प्रयास भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो कला, संगीत और नृत्य के माध्यम से एकता और विविधता को संरक्षित कर रहा है।

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