फ़रवरी 13, 2026

राष्ट्रपति मुर्मु और राष्ट्रपति पेना की ऐतिहासिक मुलाकात: भारत–पराग्वे संबंधों को मिला नया आयाम

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भारत और दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम कदम तब उठाया गया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का राष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिक अवसर को चिह्नित करने हेतु राष्ट्रपति मुर्मु ने उनके सम्मान में एक विशेष भोज का आयोजन भी किया, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

🌐 साझा मूल्यों की आधारशिला

अपने स्वागत भाषण में राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और पराग्वे के संबंध सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और वैश्विक शांति की सोच पर आधारित हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक प्रणाली में विश्वास रखते हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिरता व समावेशी विकास की दिशा में अग्रसर हैं।

🌍 ग्लोबल साउथ में साझा दृष्टिकोण

भारत और पराग्वे दोनों ही ‘ग्लोबल साउथ’ (वैश्विक दक्षिण) के भागीदार हैं—एक ऐसा समूह जो विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर उठाता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने ज़ोर दिया कि इन दोनों देशों का वैश्विक मंचों पर सहयोग जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संक्रमण और न्यायसंगत वैश्वीकरण जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

🍽️ कूटनीति के साथ संस्कृति का संगम

विशेष भोज के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक साझेदारी पर भी चर्चा हुई। भारतीय और पराग्वेई व्यंजन, पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह भोज एक अनोखे कूटनीतिक सौहार्द्र का प्रतीक बन गया।

🤝 द्विपक्षीय सहयोग की नई दिशा

इस मुलाकात में व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सहयोग और कृषि क्षेत्र में संभावित साझेदारी पर विशेष बल दिया गया। पराग्वे भारत की आईटी और फार्मा क्षेत्रों में रुचि दिखा रहा है, वहीं भारत पराग्वे के कृषि-निर्यात, जैविक उत्पादों और ऊर्जा संसाधनों में निवेश के अवसर तलाश रहा है।

🕊️ निष्कर्ष

राष्ट्रपति मुर्मु और राष्ट्रपति पेना की यह मुलाकात भारत–पराग्वे संबंधों के इतिहास में एक निर्णायक क्षण के रूप में दर्ज की जा सकती है। जहां एक ओर यह भारत की ‘एक्ट लैटिन अमेरिका’ नीति को गति देती है, वहीं दूसरी ओर पराग्वे के लिए यह एशिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सहयोग को विस्तार देने का एक सुनहरा अवसर है।

यह मुलाकात इस बात की गवाही देती है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद दो लोकतांत्रिक राष्ट्र साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और समान हितों के आधार पर घनिष्ठ साझेदारी स्थापित कर सकते हैं।

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