फ़रवरी 13, 2026

ब्रिक्स में भारत की डिजिटल नेतृत्व की बुलंद घोषणा: डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने वैश्विक मंच पर पेश किया भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल

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ब्राजील के ब्रासीलिया में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि उसका डिजिटल परिवर्तन केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक डिजिटल भविष्य का मार्गदर्शक बन चुका है। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मॉडल को वैश्विक मानक के रूप में प्रस्तुत किया।

भारत का DPI मॉडल: समावेश और नवाचार का प्रतीक

डॉ. चंद्रशेखर ने अपने भाषण में आधार और यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) जैसे नवाचारों की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिन्होंने करोड़ों भारतीय नागरिकों को डिजिटल पहचान और वित्तीय समावेशन के माध्यम से सशक्त किया है। आधार ने 95 करोड़ से अधिक नागरिकों को डिजिटल सेवाओं तक सहज पहुंच दी है, जबकि UPI अब वैश्विक डिजिटल लेनदेन का 46% संभाल रहा है।

उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दिया, जिन्होंने भारत को न केवल डिजिटल रूप से सक्षम बनाया बल्कि एक ऐसे मॉडल की स्थापना की जो अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

सहयोग और साझा विकास की वकालत

भारत ने ब्रिक्स देशों से आह्वान किया कि वे समावेशी डिजिटल विकास के लिए DPI आधारित सहयोग को बढ़ावा दें। उन्होंने भारत के खुले और इंटरऑपरेबल प्लेटफार्मों को एकाधिकारविहीन डिजिटल नवाचार का मॉडल बताया जो वित्तीय समावेशन, सुशासन और नागरिक सहभागिता को गति देता है।

भारत की संचार साथी पहल, जो दूरसंचार धोखाधड़ी से लड़ने की एक सशक्त रणनीति है, का भी उल्लेख किया गया, साथ ही साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और डिजिटल विश्वास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया।

अंतरिक्ष और पर्यावरणीय स्थिरता पर भारत की भूमिका

डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि अंतरिक्ष आज के डिजिटल युग का महत्वपूर्ण आधार है। भारत ने सैटकॉम और IOT आधारित उपग्रह सेवाओं को विनियमित कर डिजिटल संचार की पहुंच को और व्यापक बनाया है। उन्होंने अंतरिक्ष संसाधनों के उपयोग में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना अपनाने का आह्वान किया।

वहीं, उन्होंने डिजिटल विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों जैसे ई-कचरे पर चिंता व्यक्त की और ICT क्षेत्र में हरित ऊर्जा तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था के समावेशन को आवश्यक बताया।

वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर भारत

भारतनेट जैसी ऐतिहासिक योजनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक 2,18,000 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा है। भारत की 95% से अधिक आबादी 4G से और 80% से अधिक आबादी 5G से जुड़ चुकी है। भारत दुनिया में सबसे कम डेटा दरों वाला देश है – केवल 12 सेंट प्रति जीबी।

डॉ. चंद्रशेखर ने 2026 में भारत में आयोजित होने वाली अगली ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक में सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करते हुए “वसुधैव कुटुम्बकम” के सिद्धांत को दोहराया और कहा कि “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की भावना भारत की वैश्विक डिजिटल नीति का मूलमंत्र है।


निष्कर्ष

डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर द्वारा ब्रिक्स मंच पर प्रस्तुत भारत का डिजिटल दृष्टिकोण सिर्फ तकनीकी उपलब्धियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक समावेशिता, न्यायसंगत विकास और सहयोगात्मक नेतृत्व की नींव है। भारत अब न केवल डिजिटल अंतर को पाट रहा है, बल्कि डिजिटल नेतृत्व का नया मानक भी स्थापित कर रहा है।


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