किसानों के खेतों से संवाद तक: केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की महाराष्ट्र यात्रा
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भारत में कृषि केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक परंपरा, जीवनशैली और राष्ट्र की आत्मा है। इसी भावना को साकार करने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 3 जून 2025 को महाराष्ट्र के पुणे ज़िले के नारायणगांव क्षेत्र का दौरा किया। यह दौरा केवल एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि किसानों के बीच जाकर उनकी ज़मीनी समस्याएं समझने और समाधान खोजने की एक महत्वपूर्ण पहल थी।
🌱 खेतों में पहुंचकर समझा संकट
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने नारायणगांव के टमाटर उत्पादक किसानों से मुलाकात की और खेतों में जाकर प्रत्यक्ष रूप से फसल की स्थिति का जायज़ा लिया। इस दौरान किसानों ने बताया कि टमाटर की फसलों पर वायरस का गंभीर हमला हुआ है, जिससे उपज प्रभावित हो रही है। मंत्री ने तुरंत वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस समस्या के शीघ्र समाधान हेतु प्रभावी अनुसंधान और तकनीकी सहायता प्रदान करें।
🧪 जलवायु अनुकूल कृषि की ओर कदम
श्री चौहान ने इस अवसर पर कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए अब हमें ऐसी फसल किस्में विकसित करनी होंगी जो बढ़ते तापमान और क्षेत्र विशेष की जलवायु के अनुकूल हों। यह समय नवाचार और कृषि विज्ञान में तेज़ी से आगे बढ़ने का है।
🌿 पौधारोपण और पदयात्रा से जुड़ी जनजागरूकता
यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने एक पदयात्रा में भाग लिया, जिससे किसानों और ग्रामीण जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित हो सके। यह पहल “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य देश के कोने-कोने में जाकर किसानों की समस्याओं को समझना और समाधान प्रस्तुत करना है।
🗓️ 15 दिवसीय राष्ट्रीय अभियान
श्री चौहान ने बताया कि यह अभियान 29 मई से 12 जून 2025 तक चलेगा, जिसके दौरान वे देशभर के किसानों से मिलेंगे। उन्होंने सभी कृषि अधिकारियों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान भी किया। यह एक ऐसा मंच है जो नीति निर्माताओं और किसानों को सीधे जोड़ता है।
🌾 निष्कर्ष:
केंद्रीय कृषि मंत्री की यह यात्रा केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक किसान-हितैषी प्रयास था। श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह सिद्ध किया कि नीति का सबसे प्रभावी रास्ता खेतों की मिट्टी से होकर गुजरता है। उनकी यह पहल भारतीय कृषि के उज्ज्वल भविष्य की नींव है – एक ऐसी व्यवस्था जहां किसान की आवाज़ सीधे केंद्र तक पहुंचे और उसका समाधान भी खेत की मेड़ पर खड़ा हो।
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