विकसित कृषि संकल्प अभियान: किसानों के लिए नई दिशा और समृद्ध भविष्य

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस अभियान के तहत केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बेंगलुरु के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से सीधा संवाद किया। उनका यह दौरा भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु में हुआ, जहाँ उन्होंने किसानों के साथ कृषि नवाचार और बागवानी की उन्नत तकनीकों पर विचार साझा किए।
कमलम की खेती: किसानों के लिए लाभकारी विकल्प
श्री चौहान ने ‘कमलम’ (ड्रैगन फ्रूट) की खेती का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत के दो वर्षों में अपेक्षाकृत कम लाभ होता है, लेकिन तीसरे वर्ष से किसानों को 6 से 7 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। यह जानकारी उन्होंने किसानों से सीधे बातचीत में प्राप्त की, जो उनके अनुभवों पर आधारित थी। साथ ही, उन्होंने टमाटर की खेती का भी उदाहरण दिया जहाँ कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद एक एकड़ में 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी संभव होती है।
लैब से लैंड तक: अनुसंधान का लाभ किसानों तक
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचना चाहिए। जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता और क्षेत्रीय विशेषताओं के अनुरूप वैज्ञानिकों को किसानों को प्रशिक्षण देने की जरूरत है। यह ‘लैब से लैंड’ की अवधारणा को मजबूत करता है, जो विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कृषि का राष्ट्रीय विकास में योगदान
श्री चौहान ने यह भी बताया कि देश की जीडीपी में कृषि का योगदान लगभग 18 प्रतिशत है, और वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में जीडीपी विकास दर 7.5 प्रतिशत रही, जिसमें कृषि का योगदान 5.4 प्रतिशत है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की कृषि प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है।
चार प्रमुख लक्ष्य: कृषि विकास का आधार
केंद्रीय मंत्री ने चार प्रमुख लक्ष्यों को रेखांकित किया जो देश को खाद्य सुरक्षा एवं पोषणयुक्त आहार सुनिश्चित करने की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं:
- 145 करोड़ नागरिकों के लिए खाद्य सुरक्षा
- पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता
- कृषि क्षेत्र को लाभकारी बनाना
- मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बनाए रखना
नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्ती
उन्होंने कहा कि गुणवत्ताहीन बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के निर्माण पर सरकार कठोर कार्रवाई करेगी। इसके लिए नए कानून भी प्रस्तावित हैं ताकि किसानों को धोखाधड़ी से बचाया जा सके।
‘एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम’ का विजन
इतिहास में पहली बार 16,000 वैज्ञानिक खेतों में जाकर किसानों को अनुसंधान की जानकारी दे रहे हैं। श्री चौहान ने ‘एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम’ की अवधारणा को बल देते हुए सभी हितधारकों से मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। यह प्रयास भारत को ‘विश्व का खाद्य टोकरी’ (Food Basket of the World) बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS): उचित दाम का समाधान
बाजार में किसानों को फसल का उचित मूल्य मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना लागू की है। इस योजना के अंतर्गत यदि किसान आलू, टमाटर, प्याज जैसी फसलें उन क्षेत्रों में बेचते हैं जहाँ दाम अधिक हैं, तो परिवहन की लागत सरकार वहन करेगी। साथ ही भंडारण की सुविधा हेतु भी केंद्र सरकार आर्थिक सहायता देगी।
अंतिम संदेश: कृषि विविधीकरण और निर्यात की दिशा में आगे बढ़ें
अपने समापन भाषण में श्री चौहान ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ कृषि विविधीकरण, प्रोसेसिंग और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की ओर ध्यान देने का अनुरोध किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए हरसंभव उपाय कर रही है।
निष्कर्ष
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ न केवल किसानों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और अवसरों का द्वार खोल रहा है, बल्कि भारत को कृषि के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम भी उठा रहा है। श्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम का यह अभियान निश्चित ही भारत के कृषि परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।
