फ़रवरी 14, 2026

यूक्रेन में शांति के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैश्विक

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Anoop singh

21 जून 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य यूक्रेन में जारी संघर्ष पर गहन चर्चा करना और वैश्विक शांति प्रयासों को पुनर्जीवित करना था। इस बैठक ने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि यूक्रेन संकट केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवता का मुद्दा है।

🔷 वैश्विक शांति की पुकार

बैठक में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि युद्ध का कोई स्थायी समाधान नहीं होता। वक्ताओं ने आग्रह किया कि सभी संबंधित पक्ष बिना शर्त के वार्ता की मेज पर लौटें और एक स्थायी तथा सार्थक युद्धविराम की दिशा में ईमानदारी से प्रयास करें।

🔷 मानवीय संकट पर विशेष चिंता

सुरक्षा परिषद ने यूक्रेन में बिगड़ती मानवीय स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। कई देशों ने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जाए। आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की बात की गई, खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता जताई गई।

🔷 कूटनीतिक प्रयासों की अहमियत

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि यूक्रेन को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान बनाए रखना अनिवार्य है। परिषद के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि दुनिया ने अपने कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर पड़ने दिया, तो यह संघर्ष और विकराल रूप ले सकता है।

🔷 दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विश्वास, शासन व्यवस्था और सामाजिक पुनर्निर्माण से समाप्त होते हैं। ऐसे में केवल युद्धविराम ही नहीं, बल्कि यूक्रेन में स्थायी सुरक्षा और पुनर्निर्माण की योजना भी जरूरी है।

🔷 वैश्विक एकजुटता की मिसाल

इस सत्र के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र ने न केवल यूक्रेन के मुद्दे पर, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक संदेश दिया — कि जब बात अंतरराष्ट्रीय शांति की हो, तो हमें एकजुट होकर, करुणा और धैर्य के साथ आगे आना होगा। यह केवल एक देश की नहीं, बल्कि समस्त मानवता की लड़ाई है।


🔖 निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यह बैठक यूक्रेन में शांति के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। यह वैश्विक नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश था कि कूटनीति, सहयोग और सहानुभूति ही उस रास्ते के पत्थर हैं, जिनसे स्थायी शांति की इमारत खड़ी हो सकती है।


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