उत्तर प्रदेश में अधोसंरचना की क्रांति: गंगा एक्सप्रेसवे बना प्रगति का मार्ग

लखनऊ, 21 जून 2025 – उत्तर प्रदेश आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां अधोसंरचना विकास राज्य की आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक तरक्की का नया आधार बनता जा रहा है। इस परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है गंगा एक्सप्रेसवे — एक ऐसा महामार्ग जो न केवल शहरों को जोड़ता है, बल्कि पूरे उत्तर भारत के विकास की धुरी भी बन रहा है।
गंगा एक्सप्रेसवे: आधुनिक भारत की जीवनरेखा
गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा छह लेन (आवश्यकता अनुसार आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकने वाला) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक फैला है। इस महामार्ग को 120 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन स्पीड के साथ तैयार किया जा रहा है, जिससे मेरठ से प्रयागराज की यात्रा मात्र 6 घंटे में पूरी हो सकेगी — जो पहले 10–12 घंटे में होती थी।
यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से शुरू होकर अमरोहा, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, रायबरेली जैसे प्रमुख ज़िलों को पार करता हुआ पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक पहुंचेगा। इसका लाभ सीधे तौर पर लाखों लोगों को मिलेगा, जिनका जीवन तेज़ और सुलभ परिवहन से जुड़ जाएगा।
संपर्क और समावेशी विकास का आधार
गंगा एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख मार्गों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश का एक व्यापक और मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार हो रहा है। इस नेटवर्क से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य है राज्य को उत्तर भारत का ‘लॉजिस्टिक्स हब’ बनाना, जहां उद्योग और कृषि, दोनों को तेज़ गति से बाजारों तक पहुंच मिल सके। गंगा एक्सप्रेसवे इसी सोच की बुनियाद है।
विकास की राह पर अग्रसर उत्तर प्रदेश
गंगा एक्सप्रेसवे जैसे परियोजनाएं केवल भौगोलिक दूरी को ही नहीं मिटा रहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दूरियों को भी कम कर रही हैं। इस परियोजना से न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी और यात्री सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार इस परियोजना को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानती है, और यह भी स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश अब विकासशील राज्य नहीं, बल्कि ‘विकास का मॉडल’ बनता जा रहा है।
निष्कर्ष: सड़कें नहीं, भविष्य बन रहा है
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के भविष्य की दिशा तय कर रहा है। यह सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है — आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और तेज़ रफ्तार भारत का। उत्तर प्रदेश आज न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे देश के लिए विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
