फ़रवरी 14, 2026

ईरान पर अमेरिकी हमले की पाकिस्तान द्वारा कड़ी निंदा: क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा

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Anoop singh

इस्लामाबाद, 22 जून 2025 — पाकिस्तान सरकार ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिका द्वारा किए गए ताज़ा हवाई हमलों की तीव्र आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता के उल्लंघन की संज्ञा दी है। इस्लामाबाद ने इन हमलों को खतरनाक और उकसावे की कार्रवाई करार देते हुए कहा कि इससे न केवल मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ेगा, बल्कि समूचे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “हम ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की कठोर निंदा करते हैं। इस प्रकार की आक्रामक कार्रवाइयाँ न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि क्षेत्र में पहले से मौजूद अस्थिरता को और अधिक गहरा कर सकती हैं।”

क्षेत्रीय असंतुलन की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह सैन्य कार्रवाई ईरान के साथ पहले से चल रहे तनाव को एक खतरनाक मोड़ पर ले जा सकती है। पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश, जो स्वयं भी कई वर्षों से आतंकवाद और सीमावर्ती संघर्षों से जूझ रहे हैं, इस तरह की घटनाओं को अपने लिए भी अस्थिरता का कारण मानते हैं।

इस्लामाबाद की नीति पारंपरिक रूप से क्षेत्रीय शांति और बातचीत की पक्षधर रही है। पाकिस्तान ने बार-बार यह दोहराया है कि सभी देशों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से अपने मतभेद सुलझाने चाहिए, न कि सैन्य ताकत के सहारे।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करें। बयान में यह भी कहा गया कि परमाणु प्रतिष्ठान जैसे संवेदनशील स्थानों पर सैन्य हमले न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध हैं, बल्कि यह मानवता के लिए खतरा भी हैं।

ईरान-पाकिस्तान संबंध

ईरान और पाकिस्तान के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध ऐतिहासिक रूप से गहरे रहे हैं। ऐसे में ईरान पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को पाकिस्तान सीधे अपने क्षेत्रीय हितों के खिलाफ मानता है। साथ ही, यह घटनाक्रम चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसे परियोजनाओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल सकता है।

निष्कर्ष

ईरान पर अमेरिका का यह हमला न सिर्फ वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है, बल्कि दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की स्थिरता को भी खतरे में डाल सकता है। पाकिस्तान की ओर से की गई निंदा इस क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की एक कोशिश है, जो शांति और संवाद को प्राथमिकता देती है।


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