यूरोप-चीन संबंधों के 50 साल: बीजिंग में नई साझेदारी की ओर कदम

24 जुलाई 2025 को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन बीजिंग पहुँचीं, जहाँ उन्होंने यूरोप और चीन के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्षों की उपलब्धि को चिह्नित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने आशा जताई कि यह शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों के लिए संबंधों को और आगे बढ़ाने और संतुलित करने का एक सुनहरा मौका है।
इस यात्रा के दौरान वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि यूरोप और चीन के बीच सहयोग को “पारस्परिक रूप से लाभकारी” बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि हम बीते 50 वर्षों की उपलब्धियों से आगे बढ़कर अगले 50 वर्षों के लिए एक नई दिशा तय करें — एक ऐसा रिश्ता जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर सके।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यूरोप और चीन के बीच संबंधों की नींव 1975 में रखी गई थी। तब से अब तक व्यापार, तकनीक, शिक्षा, जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों में व्यापार असंतुलन, मानवाधिकारों के मुद्दे और भू-राजनीतिक तनावों के चलते संबंधों में कुछ खटास भी आई है।
वर्तमान शिखर सम्मेलन का महत्व
इस वर्ष का यूरोपीय-चीनी शिखर सम्मेलन न केवल बीते समय का मूल्यांकन करने का अवसर है, बल्कि यह आगे की रणनीति तय करने के लिए भी अहम है। दोनों पक्षों के नेता इस दौरान व्यापार नियमों, हरित ऊर्जा निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
वॉन डेर लेयेन की इस यात्रा को संकेत माना जा रहा है कि यूरोपीय संघ, चीन के साथ एक सशक्त लेकिन संतुलित भागीदारी को लेकर गंभीर है। यह न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्थिरता के संदर्भ में भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
यूरोप और चीन के बीच 50 वर्षों के संबंधों की यह स्वर्ण जयंती सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखने का अवसर है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन का बीजिंग दौरा यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों में अब भी संवाद, सुधार और सहयोग की गुंजाइश है। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो अगले 50 वर्ष वैश्विक सहयोग की एक नई मिसाल बन सकते हैं।
